प्रदूषण ने सर्दियों को बीमारू सीजन बना दिया है। डाक्टरों का कहना है कि यह माना जाता रहा है कि जाड़े में संक्रमण कम होता है, सिर्फ ब्लड प्रेशर और हृदय रोगियों को दिक्कत होती है, लेकिन इस वक्त छाती के संक्रमण के रोगी भी आ रहे हैं।
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कालेज की मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि ऐसा ट्रेंड पहली बार देखने को मिल रहा है। छाती के संक्रमण और दूसरे संक्रमण के रोगी ओपीडी में भी आ रहे हैं और कुछ को भर्ती भी किया गया है।
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डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने के कारण जहरीले तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को घटा रहे हैं। शरीर में एंटी आक्सीडेंट घट जाते हैं।
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इसके साथ ही अल्ट्रा फाइन पार्टिकल सांस के जरिये शरीर के अंदर जाकर खून में मिल जाते हैं। ये फेफड़ों के अलावा दूसरे अंगों को भी कमजोर कर देते हैं।