इन सबस्टेशनों में पहले शुरू होगा काम
गर्मी में कल्याणपुर, नौबस्ता, हंसपुरम, दहेली सुजानपुर, जाजमऊ, विकासनगर, रतनपुर, गुमटी, हैरिसगंज, नवाबगंज डिवीजन क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत आई थी। यहां के सब स्टेशनों को सबसे पहले उच्चीकृत करने की प्लानिंग है।
दादानगर डिवीजन में लगेंगे बड़े ट्रांसफार्मर
दादानगर डिवीजन के सबस्टेशनों में 20 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इनके लगने से औद्योगिक क्षेत्रों में वोल्टेज और ओवरलोडिंग की समस्या कम हो जाएगी। अभी आगरा, लखनऊ, गाजियाबाद समेत कुछ ही शहरों में बड़े ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं।
केस्को एक नजर में…
उपभोक्ता: सात लाख 20 हजार
बिजली डिवीजन: 20
सबस्टेशन: 94
टेस्ट डिवीजन: 04
ट्रांसफार्मर: 7486
कई सबस्टेशनों के ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। पांच एमवीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर को निकालकर दस एमवीए क्षमता के लगाए जाएंगे। पांच एमवीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर का भी उपयोग अन्य सबस्टेशनों में किया जाएगा। इससे पांच एमवीए क्षमता वाले सबस्टेशन बढ़कर दोगुने हो जाएंगे। -सैमुअल पॉल एन, केस्को एमडी
फीडर, ट्रांसफार्मर, लाइन को भी किया जाएगा अपग्रेड
शहर को डेढ़ से दो साल के अंदर निर्बाध बिजली देने की तैयारी है। इसमें रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के अंतर्गत फीडर, ट्रांसफार्मर और पूरे सप्लाई सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। प्लानिंग के संबंध में दस दिन बाद बैठक होने की उम्मीद है। केस्को अधिकारी स्कीम को सरकार के सामने प्रस्तुत करेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द बजट भी जारी हो सकता है।
आरडीएसएस के तहत होंगे काम, दस दिन बाद बैठक संभव
अभी 14 सबस्टेशन स्काडा से जुड़े हैं। उनके फीडरों को रिंग मेन यूनिट की मदद से दूसरे फीडर से जोड़ा जा सकता है। अगर किसी फीडर में सप्लाई प्रभावित हुई, तो दूसरे से बिजली मिलती रहेगी। यह सिस्टम कुछ क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। इस सिस्टम में समस्या यह आ रही है कि अचानक दूसरे फीडर पर लोड बढ़ जाता है, जिसकी वजह से लाइन और फीडर में फॉल्ट आने की आशंका रहती है। इस समस्या को देखते हुए फीडर, लाइन, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर और पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
यह है केस्को का प्लान
पावर ट्रांसफार्मर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर और लाइन पर 60 फीसदी या उससे कम का ही लोड रहे, जिससे दूसरे फीडर को सप्लाई दी जानी हो तो उस पर एकदम से लोड न आ सके। पूरे सिस्टम की क्षमता प्रभावित फीडर के लोड को झेलने की हो जाए। इस कड़ी में सबसे पहले पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता में बढ़ोतरी की जा रही है।