डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई एप नहीं है। कॉमन एप तो प्ले स्टोर पर ढेरों मिल जाएंगे, लेकिन पुलिस से लोकल कनेक्ट करता कोई एप नहीं लांच किया गया है। 2014 में महिलाओं की सुरक्षा के लिए लांच की गई सुरक्षा एप ‘एसओएस’ भी प्रचार प्रसार के अभाव में धड़ाम हो गया। वहीं, व्यापारियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन को लांच किया गया है।
महिलाओं का कहना है ऐसी कोई सुरक्षा एप उनके लिए भी लांच की जाए, ताकि वह स्वच्छंद होकर यात्रा कर सकें। यूपी 100 इमरजेंसी सर्विसेज एप को गूगल प्ले स्टोर या एप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। सराफा कारोबारी किसी भी आपात स्थिति में एप पर इमरजेंसी पैनिक बटन का प्रयोग कर पुलिस की मदद हासिल कर सकते हैं।
इस मोबाइल एप के माध्यम से आपात स्थिति में संबंधित दुकान-स्थान की फोटो, ऑडियो तथा वीडियो की स्वचालित रिकॉर्डिंग यूपी 100 कंट्रोल रूम तथा जिले के व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी को भेज दी जाती है। इससे निकटतम पुलिस जल्द से जल्द मौके पर पहुंच जाती है। महिलाओं का कहना है कि कुछ ऐसी एप उनके लिए भी लांच होने चाहिए।
डायल 181 भी सहायता को तत्पर
महिला सुरक्षा के लिए डायल 181 भी है। उत्तर प्रदेश सरकार के महिला कल्याण, बाल व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से यह हेल्पलाइन शुरू की गई है। महिला उत्पीड़न, छेड़छाड़ आदि घटनाओं पर इसकी विशेष पुलिस सक्रिय भूमिका निभाती है। यदि आप खतरे में हैं तो आपके बच्चे भी हेल्पलाइन पर सूचित कर सकते हैं, सुरक्षा बल शीघ्र सहायता के लिए पहुंचेगा।
2014 में लांच किया एप, किसी को पता नहीं
महिलाओं की सुरक्षा के लिए 2014 में एसओएस एप लांच किया गया। इस एप में एक आइकन बना था, जब भी कोई महिला मुश्किल में हो तो उसे यह बटन दबाना होता था। बटन दबाते ही लोकल पुलिस के पास उसकी लोकेशन पहुंच जाती, साथ ही मोबाइल में फीड चार नंबरों पर भी महिला का अलर्ट पहुंच जाता।
अब यह योजना कब बंद हुई इसका पता भी नहीं चला। 11 नवंबर, 2014 को बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गट्टा ने एप को लांच किया था। दिल्ली में निर्भया कांड होने के बाद तत्कालीन एसएसपी के इमेनुएल ने इस एप लांच करने में अहम भूमिका निभाई थी। एसएसपी के बदलने के बाद योजना ठप हो गई थी।