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रेमडेसिविर कोरोना में रामबाण नहीं, फेफड़ों में बदलाव का अलग होता है इलाज, जबरदस्ती किसी रोगी को न दें

Tue, 20 Apr 2021 07:55 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोरोना के इलाज के लिए रेमडेसिविर ही इकलौती दवा नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के इलाज के लिए यह रामबाण भी नहीं है। इसके लिए रोगी परेशान न हों।
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रेमडेसिविर दवा - फोटो : social media
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विस्तार
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कोरोना के इलाज के लिए रेमडेसिविर ही इकलौती दवा नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के इलाज के लिए यह रामबाण भी नहीं है। इसके लिए रोगी परेशान न हों। कोरोना से फेफड़ों में आने वाले बदलाव के लिए अलग दवाएं हैं, उनसे फेफड़े ठीक हो जाते हैं।
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के इलाज में रेमडेसिविर ही कारगर होने का भ्रम फैलने से इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है। नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया के नॉर्थ जोन के चेयरमैन और सीनियर फिजीशियन प्रोफेसर डॉ. एसके कटियार का कहना है कि रेमडेसिविर कोरोना में कितना फायदा करता है, अभी इसका पता नहीं है।

अगर रोगी का बुुखार लंबा खिंच रहा है तो डॉक्टर इसका भी इस्तेमाल कर लेते हैं। कोरोना से फेफड़ों में डैमेज होता है, उसकी दवा रेमडेसिविर नहीं है। डैमेज को ठीक करने के लिए अलग दवाएं हैं। उन्होंने बताया कि माइल्ड केस में रेमडेसिविर देने की जरूरत ही नहीं होती है।
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सीवियर केस में इसको आजमाया जा सकता है। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि रेमडेसिविर को जबरदस्ती नहीं दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, इसलिए लिवर, किडनी आदि की जांच कराकर इस दवा का इस्तेमाल होना चाहिए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने विशेषज्ञों की कमेटी गठित की है, यह तय करती है कि किस रोगी को रेमेडेसिविर दी जाए।
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