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Kanpur News: जिले की 60 समितियों में तीन दिन से नहीं है डीएपी , किसानों में मायूसी

Sat, 02 Dec 2023 12:55 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। गेहूं व आलू की बोआई के लिए डीएपी की जरूरत है। हालांकि बारिश होने की वजह से गेहूं व आलू की बुआई पिछड़ गई है। इधर तीन दिन से जिले की 60 समितियाें में डीएपी नहीं है। किसान समितियों में पहुंच रहे हैं तो वहां डीएपी न होने पर एनपीके या फिर यूरिया दी जा रही है। अधिकांश किसान डीएपी ही मांग रहे हैं।
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जिले में करीब तीन लाख किसान हैं। रबी सीजन की गेहूं, आलू आदि फसल के लिए 24732 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है। इसके सापेक्ष अब तक उपलब्ध 11251 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण हो चुका है। इसमें 6341 मीट्रिक टन डीएपी 60 सहकारी समितियों के जरिए किसानों में बांटी गई हैं। जबकि 4910 मीट्रिक टन डीएपी निजी दुकानों से बिकी है। अब तीन दिनों से किसी सहकारी समितियों में डीएपी नहीं है। निजी दुकानों पर अभी करीब 8 हजार बोरी डीएपी स्टाक है। समितियों में डीएपी का दाम कम होने से किसान यही से खाद लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन मायूसी हाथ लग रही है। समितियों में डीएपी स्टाक न होने की सूचना चस्पा कर दी गई है। विकल्प के रूप में किसान एनपीके लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। एनपीके का लक्ष्य 3850 एमटी है, लेकिन डीएपी की मांग अधिक होने से केवल 338 मीट्रिक टन एनपीके बंट सकी है। किसानों का तर्क है कि गेहूं की बुआई के लिए डीएपी सबसे उत्तम है। नैनो डीएपी के उपयोग की बहुत जानकारी नहीं है। इसलिए दानेदार डीएपी चाहिए जो मिल नहीं रही है।
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सहकारी समितियों में उपलब्ध डीएपी बंट गई। अब 1300 एमटी डीएपी की रैक दो दिनों के अंदर आने की संभावना है। इसके दो दिन बाद कृभको की 1600 एमटी डीएपी की रैक भी आएगी। किसान धैर्य बनाए रहें।
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-देवेंद्र वर्मन, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता
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महंगी है निजी दुकानों पर डीएपी
सहकारी समिति में उपलब्ध डीएपी सस्ती है। इसकी वजह से किसानों की फसल लागत कम आती है। इधर निजी दुकानों पर मिलने वाली डीएपी महंगी है।
साधन सहकारी समिति रसूलाबाद के सचिव धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 1000 बोरी यूरिया स्टाक में है। लेकिन डीएपी मंगलवार को खत्म हो गई। सोमवार को डीएपी की रैक आने की संभावना है। इसके लिए चेक बैंक में लगा दी गई है। समिति में यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी है। इधर बहरी कला के शिव सागर व ढिकची के ओमप्रकाश ने बताया कि समिति में डीएपी 1350 रुपए प्रति बोरी है। निजी दुकानों पर डीएपी 1545 रुपये से लेकर 1640 रुपये प्रति बोरी है। इधर मूसानगर के पीएससी कृषक सेवा केंद्र पर भी डीएपी नहीं है। किसानों को यहां यूरिया दी जा रही है। संवाद


फोटो- 3 बड़ागांव भिक्खी साधन सहकारी समिति में बंद ताला
डेरापुर की नौ सहकारी समितियों में खाद खत्म, भटक रहे किसान
डेरापुर। ब्लाक की नौ साधन सहकारी समितियों में डीएपी खत्म हो गई है। किसान भटक रहे हैं। नैनो डीएपी के प्रयोग की जानकारी न होने से इससे किसान दूरी बनाए हैं।
ब्लाक के अंतर्गत बड़ागांव भिक्खी, सरगांव खुर्द, बलाई बुजुर्ग, सलेमपुर, सरकौड़ा, रेरी, मुर्रा, परौंख सहित नौ समितियां हैं। इन समितियों में डीएपी उपलब्ध नहीं है। परौंख, रेरी, मुर्रा समिति पर यूरिया है, लेकिन कुछ किसान ही यूरिया ले रहे हैं। परौंख समिति के प्रभारी सुरेश कुमार ने बताया कि डीएपी सोमवार या मंगलवार तक आने की उम्मीद है। राम विलास द्विवेदी, निजामुद्दीन शाह, सुरेश यादव, सरमन पाल आदि ने बताया कि नैनो डीएपी के प्रयोग की पूरी जानकारी नहीं है। इसकी वजह से इसका प्रयोग करने से कतरा रहे हैं। आशंका है कि नैनो डीएपी प्रयोग से सही फसल न हुई तो मेहनत बेकार चली जाएगी। इधर कई समितियों में ताले लटक रहे हैं। सचिवों की कमी है तो पांच - पांच समितियों की जिम्मेदारी एक सचिव पर है। सरगांव खुर्द, बड़ागांव भिक्खी, सलेमपुर, बलाई बुजुर्ग समिति का प्रभार परौख समिति के प्रभारी सुरेश कुमार के पास है। बलाई बुजुर्ग, सरगांव खुर्द, सलेमपुर समितियां काफी समय से बंद हैं। अब बड़ागांव समिति पर भी ताला बंद है। संवाद

फोटो-4 मोनू तिवारी

फोटो- 5 सुरेंद्र सिंह
बोले किसान जरूरत पर नहीं मिलती डीएपी
रसूलाबाद के दया गांव निवासी किसान मोनू तिवारी ने बताया कि 4 बीघा खेत में गेहूं की बोआई करने के बाद डीएपी की जरूरत है। 3 दिन से भटक रहे है। जरूरत पर खाद नहीं मिलती है। खुले बाजार में 1545 से 1640 रुपये में डीएपी है।

समायूं गांव निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की बोआई तो कर दी लेकिन अब फसल को डीएपी की आवश्यकता है। बुधवार से लगातार साधन सहकारी समिति रसूलाबाद आ रहे हैं, लेकिन डीएपी उपलब्ध न होने से मायूसी हाथ लग रही है। निजी दुकानों पर डीएपी महंगी है।
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