गोष्ठी में जानकारी देतीं अधिवक्ता तनुश्री द्विवेदी।
- फोटो : संवाद
कानपुर। कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से सोमवार को सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के माध्यम से कर नियोजन विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति परिवार के बंटवारे में मिलती है तो उस पर दीर्घकालीन या लघुकालीन पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन टैक्स) नहीं लगता। इसे आयकर अधिनियम में ट्रांसफर नहीं माना जाता।
मुख्य वक्ता अधिवक्ता तनुश्री द्विवेदी बताया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा छह में हुए संशोधन के बाद पिता की संयुक्त संपत्ति में पुत्री को पुत्र के समान अधिकार प्राप्त हो गया है। इससे हिंदू बेटियों को दोहरा लाभ मिलता है। संयुक्त हिंदू परिवार (एचयूएफ) का गठन बच्चे के जन्म के साथ ही हो जाता है। एचयूएफ की हैसियत से साझेदारी फर्म में भागीदार या प्रोपराइटशिप फर्म के रूप में व्यापार किया जा सकता है। चल या अचल संपत्ति में निवेश कर उससे आय अर्जित की जा सकती है। एचयूएफ के रूप में आयकर विवरणी दाखिल कर उचित कर दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयकर अधिनियम की धारा 171 के अंतर्गत संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति का केवल पूर्ण विभाजन ही संभव है। संपत्ति के विभाजन के लिए अवयस्क बच्चा दावा नहीं कर सकता। सभी सहभाजकों की सहमति से असमान विभाजन भी वैध है।
सीए दीप कुमार मिश्र ने बताया कि वर्षों से एचयूएफ ने कर नियोजन, पारिवारिक संपत्ति संरक्षण और पीढ़ी-दर-पीढ़ी संपत्ति के सुचारु हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि पेशेवर के रूप में दायित्व केवल अनुपालन तक सीमित नहीं है। अपने ग्राहकों को नैतिक, विधिसम्मत और रणनीतिक सलाह देनी होती है जिसे सदैव नैतिक और कानूनन सीमाओं के भीतर ही प्रयोग करना चाहिए। इस मौके पर एसोसिएशन के महामंत्री सीए शरद सिंघल, मनीष श्रीवास्तव, अरुण अहलुवालिया, राजीव कुमार गुप्ता, विवेक अवस्थी, बीएल द्विवेदी, अजय सिंह, हरी राम अग्रवाल, प्रदीप रायजादा, प्रदीप मेहरोत्रा, आशीष जौहरी, पद्मेश वाजपेयी आदि मौजूद रहे।