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Kanpur News: कार्रवाई में खानापूर्ति, पंजीकरण से दोगुना चल रहे क्लीनिक व अस्पताल

Mon, 01 Jun 2026 01:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जनपद में निजी क्लीनिक, अस्पताल व पैथोलॉजी के मानकों को लेकर जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई में खानापूर्ति की जा रही है। इसके चलते अभियान के एक सप्ताह बाद भी जिले में पंजीकरण के सापेक्ष दोगुना अस्पताल व क्लीनिकों का संचालन किया जा रहा है। वहीं कुछ अमानक अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर पंजीकरण में किराये की डिग्री लगी है। इन अस्पतालों में बिना डॉक्टर के सुविधाएं संचालित की जा रही हैं।
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जिले में 54 निजी अस्पताल व 36 क्लीनिक पंजीकृत हैं। रसूलाबाद में अपंजीकृत अस्पताल में इलाज के दौरान महिला सफाई कर्मी की मौत व कई मानक विहीन अस्पतालों के संचालन किए जाने की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक सप्ताह पहले मानकों को लेकर जांच शुरू की थी। इस पर पंजीयन के नोडल एसीएमओ डॉ. एसएल वर्मा की ओर से मानकों को लेकर अभियान चलाकर जांच की जा रही है। उनकी जांच में भी अधिकांश नर्सिंग होम व क्लीनिकों के मानक पूरे नहीं मिले। इसके बावजूद इन क्लीनिक व अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
इसके चलते जिले में अभी भी पंजीकरण से दो गुना प्राइवेट क्लीनिक व अस्पतालों का संचालन हो रहा है। कई निजी अस्पताल ऐसे भी हैं, जिन्होंने एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री किराये पर लगाकर पंजीकरण करवा लिया और अप्रशिक्षित स्टॉफ की ओर से संचालन किया जा रहा है। वहीं कई निजी अस्पतालों में रात के समय मरीजों को भर्ती कर उपचार तो दिया जाता है लेकिन अस्पताल परिसर में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिलता है। पूर्व में स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच में भी गई पंजीकृत अस्पताल, अल्ट्रासाउंड सेंटर, क्लीनिक बिना डॉक्टर के संचालित होते मिले थे। विभाग की ओर से इनको नोटिस देकर इतिश्री कर ली गई थी। जनपद में कलेक्शन सेंटर की आड़ में अवैध पैथोलॉजी की भरमार है। छोटे से कमरे या दुकान में मशीन रखकर आधा घंटे में मरीजों को सीबीसी व अन्य जांचों की रिपोर्ट थमा दी जा रही है। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में क्लीनिक और पैथोलॉजी में अव्यवस्थाएं मिलीं।
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केस-1
बिना नाम के चल रहा क्लीनिक
रनियां के राजेंद्रा चौराहा पर एक दुकान में मानक विहीन क्लीनिक संचालित होता मिला। जिसमें संचालक की ओर से क्लीनिक का बोर्ड नहीं दर्शाया गया। दुकान के बगल में दीवार के नाम पर महज ईंटों को रखा गया है जोकि यहां आने वाले मरीजों के लिए भी खतरा बन सकती हैं। क्लीनिक में संचालक की ओर से मरीजों को बेड के स्थान पर बेंच पर लिटाकर उपचार किया जा रहा था जबकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रनियां में एलोपैथी पद्दति से महज एक क्लीनिक का पंजीकरण है।
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केस-2
दुकान में संचालित होते मिला पैथोलॉजी
झींझक नगर के द्वारिकागंज में एक दुकान में मानक विहीन पैथोलॉजी संचालित होती मिली। जिसमें संचालक की ओर से खून, बलगम, आदि की जांच होने का बोर्ड चस्पा कर रखा है। इसके अलावा भी कई अन्य मानक विहीन पैथोलॉजी का संचालन किया जा रहा है जबकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार झींझक नगर में सिर्फ चार पैथोलॉजी व एक्स-रे सेंटर का पंजीकरण है।

...................दो विभागों के पेच का मामला बता कार्रवाई से कतराते अफसर



जिले में संचालित आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक क्लीनिकों पर मानकों के अनुसार डॉक्टर संबंधित पद्दति के साथ 52 प्रकार की एलोपैथिक दवाइयां लिख सकते हैं। हाल ही में जिम्मेदारों की ओर से कई गई जांच में कई आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक क्लीनिक का कई साल से नवीनीकरण नहीं करवाया जाना पाया गया। साथ ही संचालक मरीजों को बोतल लगाते हुए भी मिले। जिम्मेदारों ने क्लीनिक दूसरे विभाग के अधीन होने की बात कहते हुए महज नोटिस देकर इतिश्री कर ली।
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बयान.....
मानक विहीन अस्पतालों व क्लीनिकों पर लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। एसीएमओ को आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक क्लीनिकों में इंजेक्शन या बोतल लगाते मिलने पर क्लीनिक सील करने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य खामियों के लिए संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया है। मानकों को लेकर लगातार अभियान जारी रहेगा। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
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