कानपुर। शहर में 50-50 व्यक्तियों के औसत से मौजूद एक-एक लावारिस कुत्ते ने राह चलना मुश्किल कर दिया है। मीट-मांस की दुकानों के आसपास के कटखने कुत्तों की वजह से तमाम दोपहिया वाहन सवार और राहगीर रास्ता बदलकर आने-जाने के लिए मजबूर हैं।
कटखने कुुत्तों की वजह से एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। नगर निगम के दो एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटरों में रोज 60 कुत्तों की ही नसबंदी हो पाती है, जो शहर में मौजूद करीब 1.25 लाख लावारिस कुत्तों की तुलना में नाकाफी साबित हो रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके निरंजन ने बताया कि शहर में 40,000 कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। शहर में कुत्तों की प्रजनन दर लगभग आधी रह गई है।
नगर निगम ने चलाया अभियान, 62 लावारिस कुत्ते पकड़े
इंटरनेशनल डॉग-डे की पूर्व संध्या पर सोमवार को नगर निगम के पांचों डॉग कैचिंग वाहनों और गैंगों ने श्यामनगर, लक्ष्मणबाग कॉलोनी, यशोदानगर, हर्षनगर, गूबा गार्डेन, कल्याणपुर, जाजमऊ, कैंट में अभियान चलाया। इन मोहल्लों में 62 लावारिस कुत्ते पकड़े गए। इन्हें नसबंदी के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर ले जाया गया। इसके अलावा बर्रा, कर्रही, दामोदरनगर, जरौली फेज-1 में अभियान चलाकर 50 लावारिस कुत्तों का वैक्सीनेशन किया।