नरैनी। खस्ताहाल नहर की पटरी एक बार फिर टूट गई। इससे कई किसानों के खेत जलभराव से चौपट हो गए। मार्च माह में भी इसी स्थान पर नहर टूटने से किसानों को लगभग 8 लाख रुपये की चपत लगी थी।
बरियारपुर बांध से इन दिनों केन नहर में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। बांध से करीब 5 किलोमीटर नीचे पड़रहा (अजयगढ़) गांव के पास जर्जर नहर पटरी करीब 30 मीटर तक ध्वस्त हो गई। नहर का पानी खेतों में भर गया है। इस पानी में काफी दूर तक खेतों को चपेट में लेकर आगे फिर नहर में गिरने का रास्ता बना लिया है। सिंचाई व केन नहर विभाग के अभियंताओं का पता नहीं है।
सिंचाई प्रखंड द्वितीय ने मार्च में 8 लाख रुपये की लागत से इसी स्थान पर पक्की दीवार का निर्माण कराया था, लेकिन निर्माण घटिया होने से नहर फिर कट गई। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता कमल किशोर ने बताया कि डाउन स्ट्रीम में उसी स्थान पर ठेकेदार से काम कराया गया था। सहायक अभियंता के मुताबिक बनाई गई दीवार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। सिर्फ मिट्टी बही है। उन्होंने कहा कि नहर में पानी कम होते ही मरम्मत कराई जाएगी। किसानों के हुए नुकसान की भरपाई पर सहायक अभियंता ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
मुआवजा न मिला तो जाएंगे कोर्ट
नरैनी। नहर टूटने से बर्बाद हुए खेतों के किसान मनपत, परदेसी, हीरालाल और बेटालाल आदि ने बताया कि नहर के पानी से हुए बहाव से खेत में गहरी कटान कर दी है। उपजाऊ मिट्टी और मेड़ बह गई है। इसे दोबारा खेती लायक बनाने में लाखों रुपये का खर्च आएगा। नाराज किसानों ने कहा कि सिंचाई विभाग ने उन्हें मुआवजा नहीं दिया तो न्यायालय की शरण लेंगे। यह सभी किसान देवरा भावतपुर गांव के हैं।