कानपुर देहात। माती डिपो से चलने वाली बसों का हाल बेहाल है। ज्यादातर बसों में फॉग लाइट की व्यवस्था नहीं है। एक बस का वाइपर रस्सी से बांधकर चलाया जा रहा है। ऐसे में रोडवेज बस में पूरा किराया वसूलने पर भी यात्रा करने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं।
माती डिपो में कुल 17 बसें हैं। इसमें एक बस नीलामी को खड़ी है। दूसरी बस से सामान ढ़ोया जाता है। डिपो के अधिकारियों का दावा है कि 15 बसें रोड पर चल रही हैं। इसमें से जिले के अंदर चलने वाली छह बसें रात में डिपो के अंदर ही खड़ी रहती हैं। शुक्रवार को पड़ताल की गई, जहां डिपो में चार बस खड़ी हुई थी। इसमें यूपी 77 एन 3779 नंबर की बस में लगा वाइपर रस्सी से बांधकर जुगाड़ से चलाया जा रहा था। घना कोहरा होने पर यह वाइपर ठीक तरीके से शीशे में जमा फॉग हटा नहीं पाएगा। इसके अलावा तीन अन्य बसों का भी हाल ठीक नहीं था। किसी भी बस में फॉग लाइट नहीं लगाई गई थी। इस वजह से घना कोहरा होने पर सामने से कौन आ रहा वाहन चालक को दिखाई नहीं देगा और हादसा होने का खतरा ज्यादा रहेगा। इसके अलावा रूट पर चलने वाली बसों की मरम्मत को लेकर फोरमैन संतोष कुमार अवस्थी का दावा है कि सभी बस ठीक तरह से संचालित हो रही हैं। सभी बसों में पेंट और साफ-सफाई कराई गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक कानपुर स्थित स्टोर से फॉग लाइट नहीं मिली है। वाइपर को भी ठीक कराया जाएगा।
धुआं फेंक रही बस, एआटीओ कार्यालय से की गई वापस
फजलगंज डिपो की एक बस बुधवार को एआरटीओ कार्यालय फिटनेस के लिए आई थी। धुआं ज्यादा फेंकने सहित अन्य कमी होने के चलते उसे वापस कर दिया गया। शुक्रवार को डिपो में खड़ी बस को चालू किया गया तो बहुत धुआं फेंक रही थी। साथ ही बस में ठीक तरह से क्लच भी काम नहीं कर रहा था। आसपास खड़े लोगों को मुंह बांधने की जरूरत पड़ी।
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चालकों ने बयां किया दर्द
उरई से आकर बस डिपो में आकर रुकी एक बस के चालक ने बताया कि यह समस्याएं अब रोडवेज डिपो के लिए आम हो गई हैं। बताया कि उसकी तरह कई लोग इस तरह की समस्याएं बताते हैं, मगर फॉग लाइट, डिपर, वाइपर व अन्य खामियां दूर कराने में महीनों गुजर जाते हैं। एक चालक ने बताया कि वह मंगलवार को उरई से बस लेकर चला, रास्ते में कोहरे की धुंध की वजह से परेशानी हुई। समस्या बताई मगर आज तक समस्या जस की तस है।
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क्या कहते यात्री
बंद नहीं होते ठीक से शीशे
ललितपुर निवासी सावित्री देवी ने बताया कि वह झांसी आने के बाद बस पर बैठी थी। उन्हें कानपुर जाना था बस बाहर से अच्छी थी मगर अंदर की स्थिति खराब थी। बस के शीशे पूरे बंद नहीं हो रहे थे, जिससे अंदर ठंडी हवा आ रही थी। ज्यादातर लोग ठिठुरते दिखे।
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रात में अंदर नहीं आती बस
माती डिपो में जैनपुर निवासी रामकिशन ने बताया कि गुरुवार रात उन्हें कानपुर जाना था। रात 9 बजे के करीब वह डिपो आए तो सन्नाटा नजर आया। वह डिपो के अंदर एक बेंच पर आकर बैठ गए, बस का इंतजार करते रहे। मगर काफी देर तक बस नहीं आई। रात 10 बजे के करीब एक बस आई वह भी हाईवे की सड़क पर खड़ी हो गई। वह अकेले थे, जब तक सामान लेकर आगे बढ़ते और आवाज देते वह चली गई। इस पर वह लौट गए और शुक्रवार सुबह जाने के लिए फिर से डिपो पहुंचे थे।