यूरोपीय यूनियन में कानपुर के उत्पादों का दखल और बढ़ाने की तैयारी
यूरोपीय यूनियन (ईयू) में ऑस्ट्रिया, अज़रबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, तुर्किए, यूनाइटेड किंगडम (यूके) आदि देश शामिल हैं। यहां चमड़ा, चमड़ा उत्पाद और फुटवियर, बेल्ट, पर्स, काठी, चप्पल, प्लास्टिक, परिधान, इंजीनियरिंग के सामान, मसालों आदि का निर्यात होता है। कानपुर से सालाना 3000 हजार करोड़ का निर्यात होता है। अमेरिका के बाद इन देशों के नागरिकों की क्रय क्षमता बेहतर है। शहर के निर्यातक अब ईयू देशों में निर्यात बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
वाना रीजन होगा नया बाजार
टैरिफ चुनौतियों से निपटने के लिए नए बाजार तलाश पर जोर दिया जा रहा है। इसमें वेस्ट एशिया-नार्थ अफ्रीका (वाना) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पश्चिम एशिया में सऊदी अरब, ईरान, इराक, इस्राइल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, यमन, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। उत्तरी अफ्रीका में मिस्र, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और सूडान जैसे देश शामिल हैं।
अमेरिका की ओर से टैरिफ में अस्थायी तौर पर राहत मिलने से निर्यातकों के होल्ड आर्डरों को रवाना करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। करीब 500 करोड़ के आर्डर होल्ड हो गए थे। 90 दिन का समय निर्यातकों के लिए राहत वाला है। समय मिलने से आगे की चुनौतियों के लिए योजनाओं पर काम किया जाएगा। -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन
टैरिफ के प्रभाव को कम से कम रखने पर सरकार काम कर रही है। इसका असर भी दिख रहा है। यूरोपीय यूनियन और वाना रीजन में दखल बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। चीन, वियतनाम, ताइवान पर अमेरिका ने ज्यादा टैरिफ लगाया है, जो कानपुर के निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर हो सकता है। -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद