कानपुर देहात। ठेकेदार की मनमानी से कलक्ट्रेट में माती तिराहे पर झरना व डॉल्फिन स्टैच्यू के लिए इंतजार और बढ़ गया है। करीब नौ लाख रुपये से यह सुंदरीकरण होना है। छह माह पूर्व काम शुरू कराया गया था लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।
नगर पंचायत प्रशासन ने कलक्ट्रेट में माती तिराहा को अलग पहचान देने के लिए 4.18 लाख रुपये से वॉटरफॉल (झरना) बनाने और सड़क के मध्य हिस्से में 4.82 लाख रुपये से डॉल्फिन स्टैच्यू बनाने का काम शुरू कराया। ठेकेदार ने मनमानी तरीके से काम कराया। मौजूदा समय में झरना व डॉल्फिन स्टैच्यू का काम अधूरा है। यह तब है जबकि बीते साल सितंबर में काम शुरू कराया गया लेकिन दिसंबर में काम बंद कर दिया गया। इस साल फरवरी मध्य में काम दोबारा शुरू कराया गया मगर काम की गति बेहद सुस्त है। लोगों का कहना है कि ठेका लेकर ठेकेदार ने बेहद सुस्ती से काम कराया है। कई माह काम रुका रहा है। पहले पुराई के लिए मिट्टी उपलब्ध न होने की बात ठेकेदार ने कही। बाद में सड़क के मध्य ढांचा बनाने में कारीगर के घायल होने की वजह बताई गई।
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वर्जन...........
कलक्ट्रेट में माती तिराहे के सुंदरीकरण कार्य तेजी से कराने के लिए ठेकेदार को निर्देशित किया गया है। अप्रैल शुरुआत में काम पूरा होने की उम्मीद है। इधर एसआईआर में ड्यूटी लगने की वजह से बाईपास मार्ग के अलावा माती मार्ग, अकबरपुर मुख्य मार्ग व बाढ़ापुर मार्ग के अतिक्रमण नहीं हटवाए जा सके हैं। बाईपास मार्ग पर सफेद पट्टी बनवा दी गई है। ताकि इसी के अनुसार वाहन निकल सके। एसआईआर के दायित्व पूरे होने पर ही अभियान चलाया जा सकेगा। उम्मीद है कि जल्द ही यह काम पूरा होगा और इसके बाद नगर के सुंदरीकरण के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम कराए जाएंगे। - आशीष कुमार, कार्यकारी अधिकारी अकबरपुर।
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आठ लाख खर्च कर बनाए बाईपास, ठेलिया व तंदूर लगा किया कब्जा
नगर निकाय में कुछ स्थलों के सुंदरीकरण की पहल का फैसला लिया गया। इसकी लोगों ने सराहना की लेकिन काम में सुस्ती से नगर का सुंदरीकरण प्रभावित है। हालात ये हैं कि अकबरपुर में ओवरब्रिज चौराहा से माती सड़क के दोनों ओर करीब आठ लाख रुपये खर्च कर बाईपास बनाए गए हैं। तैयार किए गए दोनों बाईपास पर सफेद पट्टी भी बनाई गई है। मगर बाईपास अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका है। एक बाईपास पर ठेलियां लगती हैं तो तंदूर में रोटी सेंकी जाती है। वहीं दूसरे बाईपास पर अतिक्रमण है। पैदल राहगीरों को वाहनों के बीच से ही निकलना पड़ रहा है।