आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत के बाद हुए स्टूडेंटों के आंदोलन, बवाल को शिक्षकों ने हवा दी थी। इसके साफ संकेत जांच कमेटी ने दिए हैं। आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौंपते हुए कहा है कि स्टूडेंटों को समझाया जा सकता था लेकिन शिक्षकों ने ऐसा नहीं किया। निदेशक, उप निदेशक और डीन को बंधक बनाए जाने पर भी शिक्षक खामोश रहे। इसी का नतीजा रहा कि पूरा मामला बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) और सीनेट के समक्ष ले जाने का फैसला किया गया। तय हुआ कि शिक्षकों की भूमिका देखी जाएगी। आरोप साबित होने पर कार्रवाई होगी।
रिसर्च स्कॉलर आलोक कुमार पांडेय की अगस्त के दूसरे सप्ताह में मौत हुई थी। इसके बाद स्टूडेंटों ने पठन-पाठन का काम ठप कर दिया। कैंपस की बिजली काट दी। कक्षाओं का बहिष्कार किया। कक्षाओं का संचालन जबरन बंद कराया। मान-मनौव्वल करने पहुंचे निदेशक, उप निदेशक को घंटों बंधक बनाए रखा। कुछ शिक्षकों से अभद्रता भी की गई। इसी मामले में आईआईटी प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसकी अंतिम रिपोर्ट 21 नवंबर को इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) को दे दी गई है।
आईएसी ने दंड निर्धारित करने के लिए एक और कमेटी बना दी है। यह कमेटी कार्रवाई की सिफारिश करेगी, फिर मामला बीओजी, सीनेट में ले जाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आईआईटीयंस का आपा खोना समझ से बाहर है। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी की सह पाकर स्टूडेंट भड़के थे। सबको समझाया जा सकता था लेकिन कुछ डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर ने सार्थक प्रयास नहीं किया। इसी वजह से आंदोलन उग्र हुआ और मामला बिजली काटने तक पर आ गया।