कानपुर। नशीली दवाओं को बेचने के मामले में जेल में बंद विनोद अग्रवाल ने अब तक न तो पुलिस और न ही ड्रग विभाग को पूरी सच्चाई बताई है। ड्रग विभाग के अनुसार, विनोद अग्रवाल ने तीन साल में करोड़ों रुपये की नशीली दवाओं का कारोबार किया है जिसका लेखा-जोखा उसके कंप्यूटर में है जिसे उसने अपनी फर्म से पहले ही हटा दिया था।
ड्रग विभाग के अनुसार, विनोद अग्रवाल ने सिर्फ दो साल में दवाओं के बेचने की जानकारी विभाग को दी है। वह भी अपने हिसाब से उसने कुछ दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए जिसमें से कुछ फर्जी हैं। इसका राज तब खुला जब कुछ अन्य मेडिकल स्टोर जैसे कुमार, शांति, एसजीपीएस में विभाग ने छापा मारा और नशीली दवाएं बरामद कीं। इसमें इन फर्मों ने खुद जानकारी दी कि ये दवाएं उन्होंने अग्रवाल ब्रदर्स से खरीदी हैं। विभाग को शक है कि इसने तीन साल में ऐसे कई मेडिकल स्टोर व फर्मों को दवाएं बेचीं हैं जिनकी सूचना इसने नहीं दी है। इसकी जानकारी विनोद अग्रवाल के कंप्यूटर पर है जिसे उसने अक्तूबर में ही अपनी फर्म से हटा लिया था। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल ने बताया कि उसका कंप्यूटर अगर मिल जाएगा तो काफी जानकारी मिल सकती है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि विभाग में विनोद अग्रवाल की जांच अभी भी चल रही है। विवेचना पूरी होने पर इसका मुकदमा सीएमएम कोर्ट भी दर्ज कराया जाएगा।