मामले की जांच कराई जा रही है
बेटी की आपबीती सुनकर पत्नी सुरेश के घर पहुंची। जहां सुरेश ने पुलिस से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। पुलिस के सुनवाई नहीं करने पर कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। प्रभारी निरीक्षक राजकिशोर ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच कराई जा रही है।
पिछले दिनों में आए हैं ये मामले
- पांच अगस्त को हुसैनगंज थाने में कोर्ट के आदेश पर विधवा से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज।
- पांच अगस्त को हुसैनगंज थाने में कोर्ट के आदेश पर घर में घुसकर महिला से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज।
- एक अगस्त को सुल्तानपुर घोष थाने में मानसिक बीमारी युवती से दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने के मामले में मुकदमा दर्ज।
- एक अगस्त को ललौली थानाक्षेत्र में महिला से सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास।
- 30 जुलाई को ललौली थानाक्षेत्र में बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास।
- 29 जुलाई मलवां थाने में मानसिक बीमार किशोरी से दुष्कर्म के मामले में रिपोर्ट दर्ज।
गर्भवती होने के बाद भी थाना पुलिस ने टरकाया
सुल्तानपुर घोष थानाक्षेत्र का रहने वाला एक युवक अपने मानसिक बीमारी पांच माह की गर्भवती बहन को 25 जुलाई को थाने लेकर पहुंचा था। थाना पुलिस की संवेदनहीनता रही कि कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद 31 जुलाई को एसपी के पास लेकर पहुंचा। मामला सुर्खियां बनने पर एक अगस्त को पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे कार्रवाई चालू की।
दुष्कर्म के बजाय छेड़खानी में दर्ज होते मामले
थानेदार दुष्कर्म की धारा में सीधे मुकदमा दर्ज करने से बच रहे हैं। इसी वजह से एक नया फंडा तैयार किया है। पीड़िता के आने के बाद समझाकर आरोपी के खिलाफ छेड़खानी की तहरीर ली जाती है। उसे पूरा आश्वासन दिया जाता है कि इसे दुष्कर्म में तरमीम कर दिया जाएगा। पुलिस छेड़खानी का मुकदमा दर्ज करने के बाद कोर्ट में पीड़िता के बयान दर्ज कराती है। बयान में पीड़िता अपने साथ हुई आपबीती का सच बताती है। बयान अवलोकन के बाद विवेचक दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हैं। इस तरह से पुलिस पीड़िता को भी संतुष्ट कर देती है और अपराध के ग्राफ में सीधे दुष्कर्म का मामला दर्ज होना भी प्रभावी नहीं होता है। जिले के सभी थानों पर पुलिस यही रवैया अपनाती है।
जिले में सबसे अधिक पाक्सो में दी गई मदद
आधी आबादी को हक और अधिकार दिलाने के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। शारीरिक शोषण समेत जघन्य अपराधों पर पीड़ित महिलाओं को आर्थिक रूप से सहायता देने के लिए रानी लक्ष्मी बाई एवं बाल सम्मान योजना चल रही है। योजना से जिले की अस्सी से अधिक पीड़िताओं को लाभ दिया जा चुका है। सवा सौ से अधिक पीड़िताओं की सूची शासन के पास है। योजना में सबसे अधिक मामले पाक्सो के हैं।
180 से अधिक पीड़ितों की सूची सरकार को भेजी
पाक्सो से जुड़े मामलों में कुल 54 पीड़िताओं को योजना से सहायता प्रदान की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि जिले में नाबालिग बच्चियों के साथ अपराध बढ़ा है। दहेज हत्या के मामले में 21 पीड़ित परिवारों को तीन-तीन लाख, गैंगरेप में छह को सात-सात लाख, पास्को में 54 को तीन-तीन लाख, एसिड अटैक में दो को पांच-पांच लाख, एक को साढ़े चार लाख, एक को तीन लाख, नाबालिग की रेप के बाद हत्या के मामले में एक पीड़ित परिवार को 10 लाख की आर्थिक सहायता योजना के तहत मिल चुकी है। 180 से अधिक पीड़ितों की सूची सरकार को भेजी जा चुकी है।