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Kanpur News: जिस पर आरोप, उसी को साबित करनी होगी बेगुनाही

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कानपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर शहर में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शहर के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्र संगठनों एवं शिक्षक संघों ने इन नियमों को एकतरफा बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि अब जिस पर आरोप लगा है, उसे ही अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी। इसके अलावा झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ दंड का प्रावधान खत्म करना भी सही नहीं है।
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यूजीसी ने हाल ही में लागू इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, इक्विटी कमेटी, 24×7 शिकायत निवारण व्यवस्था और विशेष निगरानी तंत्र बनाना अनिवार्य किया है। आयोग का दावा है कि इन प्रावधानों से छात्रों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। सीएसजेएम विश्वविद्यालय, एचबीटीयू सहित कई शिक्षण संस्थानों के छात्रों का कहना है कि नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं।
छात्राें का कहना है कि नियम देखकर लग रहा है कि गलती केवल सामान्य वर्ग के छात्रों की ही है। केवल छात्र ही नहीं कूटा ने भी यूजीसी के इस बदलाव को ठीक नहीं ठहराया है। उनका कहना है कि इसमें बदलाव कर इसे बेहतर किया जा सकता है। कूटा के अध्यक्ष डॉ. बीडी पांडे का कहना है कि छात्रों को जाति में बांटने की जरूरत नहीं है। झूठी शिकायत होने पर दंड का प्रावधान होना चाहिए। अभाविप के प्रांत मंत्री दिनेश याद ने कहा कि विनियमों का उद्देश्य सकारात्मक है। अस्पष्टता से भ्रम की स्थिति बन रही है। यूजीसी को जल्द ही स्पष्टीकरण देकर समता, सौहार्द और भेदभाव मुक्त शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करें।
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यूजीसी के नए नियम में यह कहा जा रहा है कि शिकायतकर्ता की शिकायत यदि झूठी निकलती है तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसी तरह जिस पर आरोप लगाया जाएगा, उसे ही यह साबित करना होगा कि उस पर लगे आरोप गलत हैं। इसी तरह के कई और बिंदुओं को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।
यूजीसी के इस नए नियम में जहां भी दिक्कत है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए। नया नियम बनाया जाना चाहिए। भाजपा सरकार सबका विकास सबका साथ लेकर चलने वाली सरकार है। हर वर्ग के बीच भाईचारा बना रहे, इसके लिए यदि कई कोई गलती है तो उसमें सुधार किया जाना चाहिए। -अभिजीत सिंह सांगा, विधायक भाजपा
यूजीसी के नए नियम को लेकर मुझे तो लगता है कि भ्रांतियां ज्यादा फैलाई जा रही हैं। न तो यूजीसी, न भाजपा ओर न ही प्रधानमंत्री की ऐसी कोई मंशा किसी को आहत करने की है। यदि किसी मामले में थोड़ा बहुत संशोधन की जरूरत है तो उसे भी कर लिया जाएगा। किसी के साथ भेदभाव जैसी कोई बात नहीं है।......सलिल विश्नोई विधायक भाजपा
भाजपा अनावश्यक समाज में बंटवारा करना चाहती है। चुनावी लाभ के लिए उसने नई बहस छेड़ दी है। समाज के हर वर्ग के बीच लड़ाई करवाना ही भाजपा का उद्देश्य रह गया है। ये लोग समाज और धर्म दोनों काे नहीं मानते हैं।......... अमिताभ बाजपेई विधायक सपा
यदि किसी भी छात्र का उत्पीड़न होता है तो समता समिति सभी के लिए समान रूप से काम करें। यही उद्देश्य होना चाहिए जिससे छात्रों के बीच समानता और सामंजस्य बना रहे। सरकार भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।.....अरुण पाठक एमएलसी भाजपा
सभी छात्रों, शिक्षकों में आपस में समानता का भाव रहे। किसी के प्रति कोई भेदभाव न हो, इसका भाजपा सरकार इसका प्रयास करती आ रही है। आगे भी अपने इसी उद्देश्य को लेकर चलेगी। यूजीसी के नियम के संबंध में अपनी बात से संगठन के उच्च अधिकारियों को भी अवगत करा चुका हूं। -सुरेंद्र मैथानी विधायक भाजपा
सरकार का एक मात्र उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास। प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार हमेशा से इस पर कायम है। यूजीसी के जो भी तकनीक पहलू हैं, दिल्ली जाने के बाद जिम्मेदार लोगों के साथ इस पर वार्ता की जाएगी। जो भी होगा सभी के हित के लिए होगा। भेदभाव जैसी कोई बात नहीं आएगी।.........रमेश अवस्थी सांसद भाजपा
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