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Kanpur News: गर्मी से जाड़े में तीन गुना हुए हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक के रोगी

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कानपुर। गर्मी की तुलना में जाड़े में हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक के रोगी तीन गुना बढ़ गए हैं। इसके साथ ही जाड़े में हार्ट अटैक के रोगियों में जटिलताएं भी बढ़ गई हैं। ब्रेन स्ट्रोक के रोगियों की नसें फटने वाले रोगी बढ़े हैं। 70 से 80 फीसदी रोगियों में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का प्रमुख कारण अनियंत्रित ब्लड प्रेशर मिल रहा है। रोगी अपनी खुराक दुरुस्त नहीं कराते या फिर ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाने पर दवाएं छोड़ देते हैं। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा का कहना है कि गर्मी के दिनों में इमरजेंसी में 15-25 रोगी औसत प्रतिदिन आते हैं। जाड़े में औसत 50 से 80 के बीच रोगी आते हैं। सबसे अधिक जाड़े वाले मौसम में 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच रोगियों की संख्या बढ़ जाती है।
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न्यूरो साइंसेस विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंह के मुताबिक गर्मियों में हैलट इमरजेंसी में ब्रेन स्ट्रोक के रोगी प्रतिदिन तीन-चार आते हैं। जाड़े में यही औसत प्रतिदिन नौ से 12 हो जाता है। जाड़े में ब्रेन स्ट्रोक के रोगियों में भी जटिलताएं बढ़ जाती हैं। जाड़ों में ब्रेन हेमरेज के मामले अधिक हो जाते हैं। रोगियों के मस्तिष्क की नसें फट जाती हैं। (ब्यूरो)
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मौसम बदलते ही बीपी की दवा बदलें
-विशेषज्ञों का कहना है कि तरीका यह है कि बीपी के रोगी जो दवा गर्मी में ले रहे हैं, उसे जाड़े में दुरुस्त करा लें। बीपी की जांच कराएं और बढ़ा होने पर तुरंत विशेषज्ञ से मिलें। अगर बीपी दवा से सामान्य रह रहा है तो दवा कतई न छोड़ें। दवा से बीपी सामान्य हुआ है। इसके छोड़ते ही फिर एकदम से बढ़ जाएगा। इससे खून का थक्का बनेगा। हृदय में गया तो हार्ट अटैक और मस्तिष्क की नस में फंसा तो ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है।
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