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Kanpur News: पांडु नदी संग नोन भी उफनाई, प्रभावित गांवों की संख्या 40 पहुंचीं

Thu, 01 Oct 2026 01:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात/ शिवली। पांडु नदी के उफनाने से रसूलाबाद-मैथा और नोन नदी का जलस्तर बढ़ने से अकबरपुर के सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में फसलें डूब गई हैं। इससे करीब 40 गांव प्रभावित हैं। करीब 200 बीघा फसल जलमग्न होने का अनुमान है।
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मैथा तहसील क्षेत्र में पांडु नदी जलस्तर दूसरी बार बढ़ने से नदी के किनारे बसे हरदिया नाला, बकसपरवा, कैलाई, मवैया, करोम, असनी, परवा, दाई ताला, प्रतापपुर, रुदा पुर, फंदा, हृदयपुर गोकुला और पकरा समेत 13 गांव के आसपास पानी भरा है। शिवली मवैया मार्ग जलमग्न हो गया है। खतरे के बीच इसी मार्ग से होकर लोग निकल रहे हैं। रात में अंधेरा होने पर लोग आवाजाही से बच रहे हैं।
जलभराव के कारण करीब 500 बीघा खेतों में तैयार धान, मक्का, तिल और बाजरा की फसलें डूब गई हैं। वहीं अतिवृष्टि से खेत में फसलें गिरने और पानी भरे रहने से भी फसलों में नुकसान है। जबकि खेतों में जलभराव से पशुओं के लिए हरा चारा की समस्या बनी है। बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण दिनचर्या प्रभावित है। एसडीएम मैथा प्रतिभा मिश्रा ने बताया कि जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पानी उतरने पर फसलों के नुकसान का सर्वे कराया कर नियमानुसार आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
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रसूलाबाद में पांडु नदी का जलस्तर स्थिर है। भीतरगांव के विष्णु शंकर शुक्ला, भग्गा निवादा के सोनू सिंह, कुर्सी खेड़ा के मनोज पाठक आदि ने बताया कि रामनगर, भग्गा निवादा, भीतरगांव, तोरना, कृष्णदत्त निवादा, भोला पुरवा, रामनगर, खेड़ा कुर्सी, दलिकपुर महाराजपुर आदि करीब 15 गांवों में रास्ते जलमग्न हैं। करीब डेढ़ हजार बीघा फसलें डूबी हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या है।
सुक्खा निवादा के भूरा ने बताया कि सात बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। तोरना के मूलचंद ने बताया कि 20 बीघा धान की फसल जलमग्न है। धीरे-धीरे पानी घट रहा है। इससे फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। तहसीलदार पंकज उपाध्याय ने बताया कि पांडु नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है। निगरानी की जा रही है। पानी उतरने पर क्षेत्रीय लेखपालों से नुकसान का सर्वे कराया जाएगा।
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नोन नदी जलस्तर बढ़ने से 12 गांवों की फसलें जलमग्न
सरवनखेड़ा। नोन नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे 12 गांवों में करीब पांच दो सौ बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गई है। इन गांवों के नजदीक से दक्षिणी नोन नदी गुजरी है। बीते दिनों हुई अतिवृष्टि से नालों से आ रहे पानी के चलते जलस्तर बढ़ा है।
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के दुर्गापुर व नरीहा गांव के बीच से नाले के रूप में निकली दक्षिणी नोन नदी बारा टोल प्लाजा के पास से होकर सरवनखेड़ा क्षेत्र के कीरतपुर, तिलौंची, ज्यूनिया, निनाया गांव पहुंचती है। इस बीच कई गांवों के नाले इसी नदी में गिरते हैं। गोगुमऊ एचपीसीएल प्लांट से निकला नाला भी विराहीपुर, बिल्टी, हृदयपुर, सरवनखेड़ा गांवों का बारिश का पानी समेटता हुआ निनाया गांव में नदी में मिल जाता है। बीते दिनों कई दिन हुई तेज बारिश से नदी उफना गई है। नदी के दोनों तरफ की 300 मीटर की जमीन डूब गई है।
जिठरौली, तड़वारा, गंगागंज, सैंथा, हिलौथी, मुर्रा, भरतपुर पियासी, निनाया सहित करीब 12 गांवों की तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का फसलें जलमग्न हैं। सैंथा निवासी अरविंद तिवारी ने बताया कि चार बीघे बाजरा की फसल पानी में डूबी है। जिठरौली निवासी विजय शंकर सिंह ने बताया कि चार बीघे बाजरा की फसल जलमग्न है। पियासी गांव के अरविंद कुशवाहा ने बताया कि तीन बीघे खेत में मक्का की फसल बर्बाद हो गई। तहसीलदार अकबरपुर पवन कुमार ने बताया कि संबंधित लेखपालों को फसल नुकसान के सर्वे के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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फोटो- 33 कल्लू सविता।
फोटो- 34 जगनायक।
मेहनत से तैयार फसलें बर्बाद हो गई
मेहनत व लागत लगाकर खरीफ सीजन की फसल तैयारी की थी। पांडु नदी का जलस्तर दो बार उफना गया। पूरी फसलें बर्बाद हो गई। - कल्लू सविता।
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इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी। कई अरमान संजोए थे। पांडु नदी का पानी बढ़ने से पूरी फसल तबाह हो गई। पूरे अरमान डूब गए। - जगनायक।
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पूर्व की बाढ़ में फसलों के नुकसान का सर्वे पूरा
कानपुर देहात। रसूलाबाद तहसील के सात गांवों में सितंबर शुरुआत में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलें जलमग्न हो गई थी। सर्वे में 874 किसानों की फसलों में 33 फीसदी से अधिक फसल नुकसान मिला। पोर्टल पर फीडिंग कराई जा रही है। पलिया-बासखेड़ा में 349 किसानों की फसलों में नुकसान हुआ है। औरंगपुर गहदेवा में 120 किसानों की फसलें नष्ट हुई। थान हमीरपुर में 80 किसानों, तोरना में 95 किसानों, खेड़ाकुर्सी में 90 किसानों, दलिकपुर महाराज में 50 किसानों और भीतरगांव में 90 किसानों की फसल में 33 फीसदी से अधिक नुकसान है। कुल 874 किसानों को आपदा राहत के तहत क्षतिपूर्ति देने के लिए प्रक्रिया के लिए फीडिंग कराई जा रही है। एडीएम वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार मौर्य ने बताया कि पूर्व में पांडु नदी जलस्तर बढ़ने से डूबी फसलों में नुकसान का सर्वे हो चुका है। इसकी फीडिंग कराई जा रही है। नियमानुसार आर्थिक मदद दी जाएगी। (संवाद)
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सिंचित क्षेत्र में कम से कम दो हजार मिलेगी मदद
फसल नुकसान पर आपदा कोष से मदद दी जाती है। 33 फीसदी नुकसान पर प्रति हेक्टेयर फसल के अनुसार सहायता राशि दी जाती है। असिंचित क्षेत्र में 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्र में 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाने का प्रावधान है। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर फसल के नुकसान तक ही आर्थिक मदद मिलती है। सिंचित क्षेत्र में न्यूनतम राशि दो हजार व असिंचित में एक हजार रुपये की मदद का प्रावधान है।
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