चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह की पैरवी के बाद लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कॉर्डियोलॉजी) में भर्ती कराए गए बुजुर्ग को डॉक्टरों ने बुधवार रात भगा दिया।
आरोप है कि निरीक्षण के दौरान मंत्री से शिकायत के बाद से कॉर्डियोलॉजी के डॉक्टर व कर्मचारी भड़के हुए थे। बुधवार दोपहर जांच के लिए गए बुजुर्ग की फाइल भी फेंक दी गई थी।
मीडिया में मामला आने के बाद आनन-फानन दो मरीजों के तीमारदारों से लिखवा लिया गया कि कर्मचारियों की कोेई गलती नहीं है, महिला ही झगड़ालू है। रात में बुजुर्ग को भगा दिया गया।
पुराना कानपुर निवासी चमनलाल यादव (75) को सोमवार दोपहर हार्ट अटैक हुआ था। परिजन उन्हें लेकर कॉर्डियोलॉजी पहुंचे तो इमरजेंसी में परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने हैलट ले जाने को कह दिया।
चमनलाल की बेटी अंजना ने निरीक्षण कर रहे मंत्री से शिकायत की तो डॉक्टरों ने भर्ती किया। अंजना का आरोप है कि भर्ती करने के बाद जब वह जांच के लिए ब्लड सैंपल लेकर पैथोलॉजी पहुंचीं तो कर्मचारी भड़के हुए थे। बुधवार दोपहर में वह पिता को जांच के लिए लेकर गईं। देर होने पर शिकायत की तो फाइल फेंक दी।
अंजना ने बताया कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार डॉक्टर ने भी पैरवी की थी लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। यह भी आरोप लगाया कि पिता को इमरजेंसी में भर्ती करते ही बाहर से दवाएं मंगाई जाने लगीं। जब कहा कि अस्पताल में 24 घंटे फ्री दवाएं देने की व्यवस्था है तो कर्मचारी हंसने लगे।
अंजना ने कहा कि अस्पताल में गड़बड़ियों की शिकायत वह खुद सीएम से करेंगी। उधर, कॉर्डियोलॉजी के डायरेक्टर, डॉ. विनय कृष्णा ने कहा कि महिला पिता की जांच के लिए लाइन में लगी थी। उसके आगे भी मरीज खड़े थे लेकिन वह सबसे पहले जांच कराना चाह रही थी। मना करने पर कर्मचारियों पर आरोप लगाया।
चमनलाल यादव का बेहतर इलाज चल रहा था और उनकी हालत भी अच्छी थी। महिला खुद उन्हें लेकर चली गई। यदि इमरजेंसी से दवा मंगाई गई है तो महिला रसीद दिखाए, जांच कराई जाएगी।