कानपुर में आम चुनावों से अलग हटकर सीसामऊ उपचुनाव में इस बार भाजपा ने अलग रणनीति के तहत काम किया। यही वजह है कि इस वर्ष मार्च में हुए लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जितने अंतर से हारी थी, इस उपचुनाव में उस अंतर को काफी हद तक कम करने में सफल रही। कहा जा रहा है कि भाजपा को जो हार मिली है, उसकी वजह संगठनात्मक कार्यशैली से अलग हटकर अन्य वजहें रहीं हैं, जिसकी समीक्षा पार्टी के अंदर एक दो दिन में की जाएगी। संगठन के तौर पर भाजपा ने सीसामऊ सीट जीतने के लिए कई स्तर पर टीम तैयार की थी। सरकार की ओर से मॉनीटरिंग करने के लिए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना को जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने सबसे ज्यादा काम इस क्षेत्र के उन हिंदू मतदाताओं के बीच किया जो काफी समय से सपा से कटे हुए थे, जिसमें सिख, पंजाबी और सिंधी वोटर शामिल हैं। उन्होंने सिख, पंजाबी और सिंधी के कुल 20 हजार मतदाताओं को अपनी ओर लाने को लेकर मशक्कत किया। हालांकि इनमें से कुल 4473 मतदाताओं ने ही वोट डाले, जिसमें भाजपा को सबसे ज्यादा 3512 वोट मिला। इसी तरह संगठन की ओर से उपचुनाव के प्रभारी बनाए गए प्रदेश उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह की ओर से मतदाताओं को बूथ तक ले जाने के लिए कार्यकर्ताओं के जरिए डोर टू डोर मॉनीटरिंग कराई गई। इस वजह से भी पिछले चुनाव परिणामों में इस बार अंतर नजर आया।