कानपुर। डफरिन अस्पताल में अनुभवी मिडवाइव्स (दाइयों) ने अपनी कुशलता और समर्पण से सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्तमान समय में ऑपरेशन के बढ़ते चलन के बीच इन स्वास्थ्य कर्मियों ने सुरक्षित और प्राकृतिक प्रसव को प्राथमिकता देकर मिसाल पेश की है। अस्पताल में तैनात मिडवाइव्स ने पिछले एक वर्ष में करीब 3000 सामान्य प्रसव सफलतापूर्वक कराए हैं। इन दाइयों की देखरेख में 5000 से अधिक महिलाओं को प्रसव पूर्व प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रसव के लिए तैयार हो सकें।
अस्पताल में तैनात मिडवाइव्स अनुपमा, कमलेश, साक्षी और सुप्रिया लगातार ओपीडी में महिलाओं को योग, व्यायाम और काउंसलिंग के माध्यम से सामान्य प्रसव के लिए प्रेरित कर रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई जटिल मामलों में भी मिडवाइव्स के धैर्य और अनुभव से ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी और सामान्य प्रसव संभव हो सका। वहीं इन मिडवाइव्स का कहना है कि प्रसव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के साथ-साथ जब प्रसूता को सही भावनात्मक सहारा मिलता है तो उनकी परेशानियां काफी हद तक कम हो जाती हैं। आज की युवा महिलाओं में प्रसव को लेकर डर अधिक है जिसे दूर करने के लिए नियमित काउंसलिंग और जागरूकता जरूरी है।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रुचि जैन और हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. दरख्शा परवीन ने बताया कि सरकार का उद्देश्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा देना है जिसमें मिडवाइव्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अस्पताल में मिडवाइफरी ओपीडी सेवाओं के तहत अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक करीब पांच हजार से अधिक महिलाओं की जांच के साथ परामर्श दिया गया। इससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिला है। यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है।