गोरखपुर से पैदल कानपुर तक पहुंचने वाले प्रदीप कुमार सिंह ।
- फोटो : AMAR UJALA
खबर दिव्यांश सिंह फोटो है ।
कानपुर । इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई ,हम न सोए रात थक कर सो गई , राही मासूम रज़ा कि यह लाइने मैनपुरी के रहने वाले प्रदीप कुमार सिंह पर लागू होती है । प्रदीप से हमारी मुलाकात रविवार को कल्याणपुर जीटी रोड में हुई । यह गोरखपुर के एक गेस्ट हाउस में नौकरी करते थे । लॉकडाउन के चलते गेस्ट हाउस बंद चल रहा है, इसलिए मालिक ने अभी कहा अब घर चले जाओ काम होगा तो फिर बुला लेंगे । घर जाने को तैयार हुए, तो कोई साधन नहीं मिला था । अंत में 12 अप्रैल को गोरखपुर हाईवे से कानपुर की ओर जाने वाली सड़क पर अपने कदमों को बढ़ा दिया । आठ दिन में पैदल कानपुर पहुंचे हैं । रास्ते में कहीं खाना मिला तो खा लिया नहीं तो भूखे पेट ही चलते रहे । प्रदीप बताते हैं कोरोना के डर से रात में किसी के घर के नीचे सोना चाहो तो लोग सोने भी नहीं देते , उनको डर रहता है , कहीं कोई कोरोना मरीज उनके घर को संक्रमित न कर जाए । मैनपुरी तक पहुंचने में अभी 200 किलोमीटर का सफर बाकी है । जिस्म में जान रही कदम बढ़ाते रहेंगे और अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाएंगे ।
गोरखपुर से पैदल कानपुर तक पहुंचने वाले प्रदीप कुमार सिंह ।
- फोटो : AMAR UJALA
गोरखपुर से पैदल कानपुर तक पहुंचने वाले प्रदीप कुमार सिंह ।