कानपुर देहात। यमुना की बाढ़ में फसल नुकसान का बीमा कंपनी डेढ़ माह में भी पूरा सर्वे नहीं कर सकी है। 140 किसानों की फसल का सर्वे हो सका है। वहीं 48 दावों का सर्वे अभी बाकी है। सर्वे की देरी से आर्थिक मदद मिलने का इंतजार बढ़ गया है।
जिले में सिकंदरा व भोगनीपुर तहसील क्षेत्र से होकर यमुना बहती है। जुलाई अंत में यमुना में बाढ़ आने खेत जलमग्न हो गए थे। राजपुर, मलासा व अमरौधा ब्लॉक के 42 गांवों की फसलें प्रभावित हुईं। इन गांवों में कुल 2471 किसानों ने फसल बीमा कराया है। जबकि बाढ़ में फसल बर्बादी पर 188 किसानों ने व्यक्तिगत बीमा दावा किया है।
बीमा कंपनी एचडीएफसी अर्गाे के प्रतिनिधियों ने सितंबर के दूसरे सप्ताह में पानी उतरने पर सर्वे शुरू किया। मगर सर्वे धीमा रहा। इसकी वजह से डेढ़ माह बीतने के बाद भी सर्वे पूरा नहीं हो सका है। हालात ये हैं कि केवल 140 व्यक्तिगत बीमा दावों पर फसल नुकसान का सर्वे हो सका है। जबकि 48 दावों का सर्वे होना बाकी है। इससे फसल नुकसान मुआवजा के लिए किसानों का इंतजार बढ़ गया है।
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वर्जन....
बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को तेजी से सर्वे के लिए कहा गया था। मगर अगस्त व सितंबर में यमुना नदी जलस्तर बढ़ने से खेत जलमग्न हो गए। इसकी वजह से सर्वे में व्यवधान पड़ा। अब खेतों से पानी उतर गया है। जल्द की सर्वे कार्य पूर्ण कराया जाएगा। - हरिशंकर भार्गव, उप निदेशक कृषि
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बीमित राशि का 25 फीसदी क्षतिपूर्ति देती बीमा कंपनी
उप निदेशक कृषि हरिशंकर भार्गव ने बताया कि फसल बीमा कंपनी फसल और नुकसान के नुकसान की भरपाई करती है। इसमें बीमित राशि का 25 फीसदी क्षतिपूर्ति प्रभावित किसान को मिलती है। यानी कि यदि एक लाख बीमित राशि है तो 25 हजार रुपये किसान को बीमा कंपनी देगी।