कानपुर। इस्पातनगर में तैयार की जा रही नकली सीमेंट का खेल उसकी जमीन से भी जुड़ा हुआ है। आमतौर पर जब कभी पुलिस अवैध कारखाना पकड़ती है तो उसकी एफआईआर में उस जमीन या मकान के मालिक के नाम का जिक्र जरूर होता है। हालांकि, नकली सीमेंट फैक्टरी के मामले में ऐसा नहीं हुआ। बताया जाता है कि अडाणी ग्रुप की इंटेलिजेंस टीम की जांच में पता चल गया था कि यह जमीन शहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति के परिवार से संबंधित है।
इसका खुलासा तब भी हुआ था जब ग्रुप की टीम के साथ पुलिस की टीम ने इस्पातनगर पहुंचकर नकली सीमेंट पकड़ी थी। तब से लेकर आज 12 दिन बीतने के बाद भी न तो नकली सीमेंट बनाने वाले ही पकड़ सकी और न जमीन के मालिक का पता कर सकी। बीते तीन सालों से इसी जमीन पर नकली सीमेंट का अवैध कारोबार किया जा रहा था।
हैरत की बात तो यह है कि दर्ज एफआईआर में फैक्टरी का पता एफ-181 तो दर्ज है लेकिन वह जमीन किसकी है इसका जिक्र नहीं है। 14 अक्तूबर को अडाणी ग्रुप की शिकायत पर पुलिस की विशेष टीम ने इस्पातनगर स्थित नकली फैक्टरी बनाने की फर्म में दबिश दी थी। पुलिस को नकली सीमेंट बनाने वाली मशीनें और 1000 से ज्यादा एसीसी व अम्बुजा की नकली सीमेंट की बोरियां मिली थीं।
मौके से फैक्टरी के मुंशी राहुल को पकड़ा था। संचालक गुप्ता बंधु नीरज-धीरज व उनके साझेदार मेरठ निवासी निशांत व सुनीत मित्तल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह जमीन एक प्रभावशाली सफेदपोश के परिवार से संबंधित है। वहीं, नकली सीमेंट को खपाने में भी सफेदपोश के ही बेहद करीबी का नाम ही जुड़ रहा है। पनकी इंस्पेक्टर दिनेश बिष्ट का कहना है कि एफआईआर ग्रुप की ओर से दी गई तहरीर के मुताबिक लिखी गई है। जमीन का असली मालिक कौन है इसकी जांच की जा रही है।
गुप्ता बंधुओं की तलाश के लिए टीम बहराइच रवाना
पुलिस के मुताबिक फैक्टरी संचालक नीरज और धीरज गुप्ता की हालिया लोकेशन बहराइच में मिली है। एक टीम सोमवार को ही वहां के लिए रवाना की गई है। मंगलवार तक दोनों भाइयों के पकड़े जाने की सुगभुगाहट पुलिस विभाग में है। वहीं, चर्चा है कि दोनों भाई गिरफ्तारी न हो इसके लिए भी कोर्ट से स्टे लेने की फिराक में हैं।