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Kanpur News: एक जनवरी से बढ़ जाएगी शहर के सीए, सीएस की भागदौड़

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कानपुर। काॅरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (आरओसी) कार्यालय को दो भागों में बांटने का निर्णय लिया है। दूसरा नया कार्यालय नोएडा में एक जनवरी से शुरू किया जाएगा। इस संबंध में अक्तूबर में अधिसूचना जारी हो चुकी है। नई व्यवस्था से शहर के सीए-सीएस को नोएडा के चक्कर लगाने पड़ेंगे। वहीं, लंबित मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी न्यायिक क्षेत्राधिकार के संबंध में आने की संभावना जताई गई है। सीए-सीएस का कहना है कि सुनवाई कहां होगी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
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कानपुर में आरओसी 1962 से स्थापित है। आरओसी में प्रदेश की 2.5 लाख कंपनियों का पंजीकरण हैं। कंपनियों के पंजीकरण में कानपुर प्रदेश में तीसरे नंबर पर है। शहर में करीब 20 हजार कंपनियां पंजीकृत हैं। इनमें पहले स्थान पर नोएडा और दूसरे पर लखनऊ है। पहले पूरे प्रदेश की कंपनियों का काम कानपुर, आरओसी के अधीन होता था। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संबंधित जिलों की कंपनियां नोएडा आरओसी के अधिकार क्षेत्र में कर दी गई हैं। विभाजन के बाद कानपुर के दायरे में मुख्यता मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश रहेगा जहां औद्योगिक इकाइयां सीमित हैं। इससे कानपुर आरओसी का कार्यभार और प्रभाव दोनों घट सकते हैं। जो कंपनी सचिव, चार्टर्ड एकाउंटेंट कानपुर में रहकर पश्चिमी यूपी की कंपनियों को सेवाएं देते हैं अब उन्हें बार-बार नोएडा आरओसी से समन्वय करना पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की खपत बढ़ेगी।
आरओसी कानपुर में इन जिलों का होगा कामकाज
कानपुर नगर, आंबेडकरनगर, अमेठी, अमरोहा, औरैया, अयोध्या, आज़मगढ़, बदायूं, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, जौनपुर, जालौन, झांसी, कौशांबी, कन्नौज, कानपुर देहात, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ, महाराजगंज, महोबा, मऊ, मिर्ज़ापुर, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संभल, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी।
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आरओसी नोएडा में इन जिलों का होगा कामकाज
आगरा, अलीगढ़, बागपत, बुलंदशहर, एटा, फिरोजाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, कासगंज, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली।
बातचीत
निरीक्षण और जांच के केस में आएंगी समस्याएं
शहर की कई कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय नोएडा में है लेकिन सारा काम कानपुर से होता है। ऐसे में जब आरओसी के अफसर बयान दर्ज करने के लिए बुलाएंगे तब प्रमोटरों को समस्या होगी। शहर में कार्यालय वर्ष 1962 से है। नई व्यवस्था के बाद सीएस प्रोफेशनल की दौ़ड़भाग बढ़ेगी। निरीक्षण और जांच के मामलों में समस्याएं आएंगी।
-सीएस, आदेश टंडन, चेयरमैन, कॉरपोरेट कमेटी, मर्चेंट चैंबर
भौतिक सुनवाई में आएंगी चुनौतियां
शहर में तमाम सीएस और सीए नोएडा की भी कंपनियों का कामकाज शहर से देखते हैं लेकिन अब उन्हें नोएडा जाना पड़ेगा। आरओसी में सभी काम ऑनलाइन होने लगे हैं। कार्यालय विभाजित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। आरओसी के विभाजन से भौतिक सुनवाई में भी नई चुनौतियां सामने आएंगी।
सीएस, वैभव अग्निहोत्री, पूर्व अध्यक्ष, कानपुर चैप्टर, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान
फाइल किस आरओसी में आगे बढ़ेगी, स्पष्ट नहीं
आरओसी के बंटवारे से सबसे ज्यादा समस्या पहले से लंबित चल रहे कामों पर आ सकती है। पुराने मामलों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। बड़ी संख्या में ऐसे प्रकरण हैं जिनमें पहले से सर्विस रिक्वेस्ट नंबर (एसआरएन) जारी हो चुका है। क्षेत्राधिकार बदल जाने के बाद यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि मामलों की फाइल किस आरओसी में आगे बढ़ेगी।
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- सीएस कौशल सक्सेना, पूर्व अध्यक्ष, कानपुर चैप्टर, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान।
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