मूसानगर। दीपाेत्सव के बाद पारंपरिक रूप से मौन व्रत धारण कर मोर पंख लेकर मौनिया घरों से निकले। 24 घंटे तक अपने को जंगल व मंदिर में छुपाए रखा। वहां भजन कीर्तन करते रहे। मंगलवार को स्नान कर व्रत तोड़ा। अच्युत ब्रह्म धाम अखंड परम धाम में दर्शन पूजन किया। इसके बाद गांव पहुंच कर लठ्ठमार कला का प्रदर्शन कर दिवारी खेली।
यमुना व सेंगुर नदी के तटवर्ती गांवों में दीपावली पर दीपक जलने के बाद मौनौती के अनुसार पारंपरिक रूप से लोगों ने मौन व्रत धारण किया। मौन व्रत धारण करने वाले लोग मोर पंख लेकर घरों से निकले नदी के तट व आसपास के जंगल में टोली बनाकर भ्रमण करते रहे। मंगलवार दोपहर नदी में स्नान कर सभी ने अपने-अपने गांवों के बाहर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शाम को गांव की महिलाएं व पुरुष गांव के बाहर पहुंच गए। जहां मौन व्रती मौनियों का तिलक लगाकर स्वागत किया।
काफी संख्या में मौन व्रत धारण किए मौनिया मूसानगर स्थित आश्रम में पहुंचे और केंद्रीय राज्यमंत्री व महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति से आशीर्वाद लेकर व्रत तोड़ा। मौन व्रत धारण किए लोगों से प्रसाद पाना शुभ माना जाता है। इसलिए मौनिया जहां से निकले वहां रास्तों में महिलाएं, पुरुष सहित सभी लोग लाइन में खड़े होकर प्रसाद लेते रहे। इसके बाद गांवों में लट्ठमार दीवारी लाठी कला का प्रदर्शन कर मनाई गई। जिसमें लाठी कला का प्रदर्शन किया। कुंभापुर, कटरी काटर, हालिया, नयापुरवा, किसान मोहल्ला, आढन, पथार, सहाबापुर, क्योंटरा बांगर, भिठरिया, सिहारी, सरौटा सहित गांवों में प्रमुख रूप से मनाया गया।