दुष्कर्म किया और धमकाकर भगा दिया
वहां उसका दोस्त जितेंद्र कुमार पहले से खड़ा था। उसकी साइकिल स्टैंड पर खड़ी कराकर दोनों प्राइवेट बस से उसे क्षेत्र के एक स्कूल के पास ले गए। वहां से पास की झाड़ियों में ले गए, जहां उसके दोस्त कल्लू, करन व विशाल मौजूद थे। सभी ने उससे दुष्कर्म किया और धमकाकर भगा दिया। इसके बाद पीड़िता के नाना ने पनकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में भेजी गई थी चार्जशीट
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि विवेचना के बाद कल्याणपुर के कश्यपनगर निवासी कल्लू, बैरी अकबरपुर निवासी करन रैदास, जगतपुरी निवासी विशाल रैदास, शाहजहांपुर के सदर बाजार निवासी अंकित यादव, शिवली के नर्वल निवादा निवासी जितेंद्र कुमार के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी।
सबूतों के अभाव में कल्लू को दोषमुक्त करार दिया
अंकित के खिलाफ एससीएसटी एक्ट का आरोप भी लगा था। अभियोजन की ओर से पीड़िता व उसके नाना-नानी समेत दस गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अंकित, जितेंद्र, करन व विशाल को दोषी मानकर सजा सुनाई, जबकि सबूतों के अभाव में कल्लू को दोषमुक्त करार दिया है।
पीड़िता ने कहा था यह दुष्कर्मी कल्लू नहीं
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि पीड़िता ने कोर्ट में चार अभियुक्तों को तो पहचान लिया था लेकिन कल्लू को पहचानने से इन्कार कर दिया था। उसने कोर्ट में कहा था कि जिस कल्लू ने दुष्कर्म किया था, अदालत में मौजूद कल्लू वह नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने कल्लू को दोषमुक्त करार दे दिया।
ऐसी सजा मिले, जिससे समाज में संदेश जाए
सजा पर सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म जैसे अपराध से समाज में बच्चियों व अभिभावकों को गंभीर असुरक्षा का भाव उत्पन्न होता है। अपराध गंभीर व जघन्य है। दोषियों को अधिकतम सजा दी जाए, जिससे अपराध की पुनरावृत्ति न कर सकें और ऐसे अपराधियों को सजा से समाज में उचित संदेश जा सके।
जितेंद्र व विशाल जमानत पर बाहर थे
भावना ने बताया कि सजा पाए अंकित व जितेंद्र की उम्र 26 साल, विशाल की 27 साल और करन की 38 साल है। जमानत न मिलने के कारण अंकित सात साल से जेल में ही बंद है। करन को इस मुकदमे में तो जमानत मिल गई थी लेकिन दूसरे मुकदमे में वह तीन साल से जेल में बंद है। जितेंद्र व विशाल जमानत पर बाहर थे।