पोकलैंड मशीनों से कूड़े को ढेर के रूप में समेटना शुरू
इधर, नगर निगम शहर से रोज निकल रहा लगभग 11.50 मीट्रिक टन कूड़ा ले जाकर प्लांट में डंप करता रहा, लेकिन निस्तारण नहीं किया गया। प्लांट परिसर से लेकर गेट तक जगह न बचने पर जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से कूड़े को ढेर के रूप में समेटना शुरू किया गया। इस वजह से यहां कूड़े के 100-100 फीट ऊंचे पहाड़ से बन गए। इस प्रकार 16 लाख मीट्रिक टन पुराना कूड़ा (लिगेसी वेस्ट) इकट्ठा होने के बाद साढ़े तीन साल पहले तत्कालीन नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी ने ताजे कूड़े का निस्तारण शुरू कराया।
पनकी ए टू जेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
- फोटो : amar ujala
भूगर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाया
साथ ही 22 करोड़ रुपये खर्च कर करीब चार लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट को सीमेंट फैक्टरियों में भेजा गया, जहां ईंधन के रूप में इसका इस्तेमाल हुआ। अभी शेष 12 लाख मीट्रिक टन पुराने कूड़े के पहाड़ लगे हैं। डेढ़ साल पहले इस प्लांट का निरीक्षण करने आई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की टीम ने भी वहां कूड़े के पहाड़ देख आपत्ति की थी। इसके निस्तारण तक कूड़े के नीचे बड़ी-बड़ी पन्नियां बिछाने के निर्देश दिए थे, ताकि भूगर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
सख्ती के बाद आईआईटी से बनवाई डीपीआर
एनजीटी की सख्ती के बाद निगम ने आईआईटी से कूड़ा निस्तारण प्लांट का सर्वे कराया और लिगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए डीपीआर बनवाकर शासन भेजी। शासन ने दो महीने पहले 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। तय हुआ कि आईआईटी कानपुर थर्ड पार्टी के रूप में कूड़ा निस्तारण की निगरानी करेगा। निगम ने टेंडर कराकर कंपनी को कार्यादेश जारी किया।
पनकी ए ए टू जेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के पीछे पांडव नदी स्थित टूटी पड़ी बाउंड्री
- फोटो : amar ujala
कूड़ा निस्तारण प्लांट में डंप 12 लाख मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारित करने के लिए आईआईटी ने कार्ययोजना तैयार की। शासन की स्वीकृति के साथ ही 45 करोड़ रुपये आवंटित हो गए हैं। ठेकेदार कंपनी का चयन कर लिया है। इस कंपनी ने तैयारी शुरू की है। 10 अप्रैल से तेजी से पुराने कूड़े का निस्तारण शुरू होगा। इसके हटने से खाली जमीन पर पार्क या मियावाकी पद्धति से मिनी जंगल विकसित किया जाएगा। -सुधीर कुमार, नगर आयुक्त