रूरा। राजस्थान के कोटा में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले नगर के तीनों दोस्तों के शव का मंगलवार को गमगीन माहौल में खेरेश्वर घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान परिजन बिलखते रहे। ढांढस बंधाने के लिए राज्यमंत्री समेत काफी संख्या में लोग पहुंचे।
नगर के रामनगर वार्ड निवासी प्रांजुल चतुर्वेदी (25), पालीवाल नगर निवासी श्रेष्ठ बाजपेयी (22), व इसी वार्ड ने अंकुश दुबे (19) के शव सोमवार की रात 12 बजे के करीब राजस्थान से रूरा आए। यहां से अंकुश दुबे का शव पैतृक गांव मंड़ौली ले जाया गया। वहीं, मंगलवार सुबह नौ बजे के करीब तीनों के शव अलग-अलग वाहनों से शिवराजपुर के खेरेश्वर घाट के लिए रवाना हुए। मृतक प्रांजुल चतुर्वेदी के पिता कृष्ण कुमार, मां सुनीता देवी, बहन रानी, माला व निक्की के अलावा पत्नी पिहू बिलखती रहीं। इकलौते बेटे के शव पर पिता व मां दहाड़े मार-मार कर रोते रहे।
वहीं, श्रेष्ठ बाजपेयी के पिता अनुपन बाजपेयी, मां विमलेश, बाबा विश्वनाथ, दादी रामरानी व छोटा भाई प्रखर बाजपेयी बदहवास रहे। अर्थी उठने पर परिवार के लोगों का हाल बेहाल रहा। मृतक दादी को परिजन संभालते रहे। वहीं, मंडौली से अंकुश की अर्थी उठी तो मां चेतना दुबे, पिता बिंदु दुबे, चाचा इंदु दुबे व बड़ा भाई आदित्य के साथ अन्य परिजन बदहवास नजर आए। घटना को लेकर कस्बा में माहौल गमगीन रहा।
राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, चेयरमैन रामजी गुप्ता, रविशशी द्विवेदी, रजोल शुक्ला, सपा नेता नीरज गौर, बसपा नेता बउआ त्रिवेदी व व्यापार मंडाल के आशीष गुप्ता, कपिल व छोटे मिश्रा ने पहुंच कर पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया। घाट पर प्रांजुल चतुर्वेदी को उसके परिवार के भाई छोटू, श्रेष्ठ बाजपेयी को उसके बाबा विश्वनाथ बाजपेयी व अंकुश दुबे को उसके चाचा इंदु दुबे ने मुखाग्नि दी।
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शोक में डूबा रहा रूरा
सोमवार की रात तीनों दोस्तो के शव एक साथ रूरा आने पर हर घर में गम का माहौल था। किसी के घर में हादसे के अलावा अन्य कोई चर्चा नहीं हो रही थी। मंगलवार सुबह होते ही लोगो का जमावड़ा मृतकों के घरों में लगने लगा। नगरवासी से लेकर आस पास गांव के लोगों ने मृतकों के घर शोक संवेदना व्यक्त की। वहीं, शवों की अंतिम यात्रा जाने के बाद ही नगर की मार्केट की दुकानें खुली।