कानपुर। कृष्णा और पारस हॉस्पिटल में निर्मला देवी की दिल व सांस की समस्या पर ध्यान दिया गया लेकिन उनके हाथ के दर्द को नजरअंदाज कर दिया। डॉक्टरों व स्टाफ की लापरवाही से उनके हाथ की कोशिकाएं और ऊतक खत्म होते चले गए। आखिर में उनके हाथ को काटना पड़ा। यह जानकारी सीएमओ की गठित छह सदस्यीय डॉक्टरों की टीम की जांच रिपोर्ट से सामने आई है। रविवार देर रात सीएमओ ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को रिपोर्ट सौंप दी है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को सांस लेने में बेहद तकलीफ थी। यह समस्या उनके दिल के 25 प्रतिशत कार्य करने की वजह से थी। उनकी स्थिति गंभीर थी, जिसके लिए कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उन्हें 13 मई को आईसीयू में दाखिल किया। कुछ इंजेक्शन, दवाओं और ऑक्सीजन से उन्हें राहत मिल गई, जबकि ऑक्सीजन व रक्त की सप्लाई न होने से उनके दाहिने हाथ में कंपार्टमेंट सिंड्रोम हो गया। खून व ऑक्सीजन कलाई के आगे बढ़ ही नहीं रहा था। निर्मला देवी ने बेटे विकास सिंह को हाथ में दर्द की जानकारी दी थी। उन्होंने भी डॉक्टर से बातचीत की जिस पर सर्जन को दिखाने के बजाय निर्मला देवी के हाथ में लगे विगो को हटा दिया गया। सूजन कम करने के लिए किसी तरह की क्रीम लगाई गई। दूसरे दिन हाथ में दर्द व सूजन और बढ़ गई। विकास सिंह ने अपनी मां को 13 मई की शाम 6:17 बजे कृष्णा में भर्ती कराया था। वह 14 मई को मां को शाम 6:15 बजे अस्पताल से लेकर निकल गए। यहां से वह रात 8:41 बजे पारस हॉस्पिटल पहुंचे। हॉस्पिटल में सांस व दिल के डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। हाथ में दर्द की दिक्कत बताने पर 15 मई की शाम लगभग पांच बजे सर्जन को बुलाया गया। उन्होंने हाथ में संक्रमण होने की आशंका पर कुछ जांचें कराई। कोशिकाएं और ऊतक कलाई से ऊपर के हिस्से को प्रभावित कर रहे थे। डॉक्टरों की टीम ने हाथ की स्थिति देखी और उसे जरूरी समझकर अलग कर दिया।