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Kanpur News: फीस बढ़ानी थी 9.5 फीसदी, निजी स्कूलों ने 12 फीसदी तक बढ़ाई

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कानपुर। नियमों को उल्लंघन करते हुए निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से 12 से 15 फीसदी तक की फीस बढ़ा दी है। शुल्क नियामक समिति बनने के बाद यह तय हुआ था कि विद्यालय केवल पांच फीसदी और उस साल के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की दर के आधार पर ही फीस बढ़ाएंगे।उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की दर 4.5 थी। इस हिसाब से 2025-26 में विद्यालयों के पास अधिकतम 9.5 फीसदी फीस को बढ़ाने का अधिकार था। फिर भी स्कूलों ने फीस में ज्यादा बढ़ोतरी कर दी है।
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अभी अभिभावक महंगी कॉपी किताबों के सेट से उभर नहीं पाए थे कि स्कूलों से दी गई फीस स्लिप ने उनके होश उड़ा दिए हैं। तिमाही फीस में 3000 से लेकर 3500 रुपये तक की वृद्धि की गई है। बिजली, महंगे इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक-कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी के नाम पर फीस बढ़ाई जाती है। इसके अलावा आईकार्ड, डायरी के नाम पर भी स्कूल अभिभावकों से पैसा लेते हैं।
अमर उजाला लगातार बढ़ती फीस और महंगी किताबों को लेकर अभियान चला रहा है। इसके बाद जिला प्रशासन भी गंभीर हुआ और निष्क्रिय पड़ी जिला शुल्क नियामक समिति को दोबारा गठित किया। बीते सोमवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर समिति की बैठक बुलाई गई, जिसमें कई स्कूलों के जवाब संतोषजनक न आने पर नौ अप्रैल को दोबारा बैठक करने के निर्देश दिए हैं। पूरे मामले में कानपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्यों ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि हर साल नियमानुसार फीस बढ़ाई जाती है। कोई भी स्कूल बिना नियम के कार्य नहीं कर रहा है।
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नियामक समिति के नियमों को भूल गए स्कूल
नियामक समिति के अनुसार, जिन स्कूलों ने पिछले साल अपने कर्मचारियों का वेतन पांच फीसदी बढ़ाया है, वह ही केवल अगले साल फीस बढ़ाने के हकदार हैं। स्कूलों ने इसमें भी खेल खेला है। कुछ स्कूल छोड़ दें तो कई स्कूलों में नाम मात्र ही वेतनवृद्धि की गई, लेकिन फीस काफी बढ़ा दी गई है।



स्कूल खुलने के बाद देते हैं फीस स्लिप
फीस स्लिप घर पहुंचते ही अभिभावकों ने माथा पकड़ लिया है। अभिभावकों का कहना है कि फीस स्लिप सत्र शुरू होने के बाद जारी की जाती है। इससे पहले तक अभिभावक यूनिफार्म, किताबें सब खरीद चुके होते हैं। उनका कहना है कि अगर शुरुआत में ही बढ़ी फीस की जानकारी मिल जाए तो बच्चे का दाखिला किसी अन्य स्कूल में करा सकते हैं।

समिति में करें शामिल
कानपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सेक्रेटरी डॉ. सुबोध कटियार ने कहा कि स्कूल अपनी गरिमा के अनुरूप कार्य करता है। एक बार जो नियम बन गए हैं, उन्हीं के आधार पर फीस ली जा रही है। जिला शुल्क नियामक समिति में सभी को शामिल किया गया है, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट को जगह नहीं मिली है। उन्होंने डीएम से मांग की कि समिति में स्कूल मैनेजमेंट से भी सदस्य शामिल किए जाएं।

आज बैठक में स्कूल देंगे जवाब
शुल्क नियामक समिति की दूसरी बैठक बुधवार को होगी। डीआईओएस अरुण कुमार ने निजी स्कूलों को दोबारा नोटिस भेजकर बुधवार को होने वाली बैठक में शिकायत के जवाब साक्ष्य सहित देने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को डीएम के समक्ष स्कूलों के प्रधानाचार्य स्पष्टीकरण रखेंगे।
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