पूविवि के प्रबंधक संकाय में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में बोलती छात्रा। अमर उजाला
कानपुर। शासन से शुल्क प्रतिपूर्ति न मिलने के कारण 25 हजार से ज्यादा स्टूडेंटों के एग्जाम पर ग्रहण लग सकता है। कॉलेजों ने बिना शुल्क प्रतिपूर्ति मिले एग्जाम दिलाने से मना कर दिया है। इस कारण यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (यूआईईटी), एचबीटीआई और कानपुर यूनिवर्सिटी के सेमेस्टर एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट परेशान हैं। उधर समाज कल्याण अधिकारी अलख निरंजन मिश्रा ने बताया कि किसी भी स्टूडेंट को एग्जाम देने से रोका नहीं जाएगा। इस बाबत कॉलेजों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
यूआईआईटी के एग्जाम मंगलवार (तीन मई) से शुरू हो रहे हैं। यहां 100 से ज्यादा एससी-एसटी स्टूडेंटों की शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं जमा हो सकी है। कई स्टूडेंटों ने अपने पास से फीस जमा की तो उन्हें एग्जाम देने दिया जा रहा है। जिन्हें एग्जाम से रोका जा रहा है, वे परेशान हैं।
यूनिवर्सिटी के सेमेस्टर एग्जाम में सैकड़ों स्टूडेंटों की फीस अब तक नहीं जमा हो पाई है। खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति के रुपये न आने से स्टूडेंट परेशान हैं। अधिकारी दो टूक कह रहे हैं कि बिना फीस जमा किए एग्जाम नहीं देने दिया जाएगा
यह है शुल्क प्रतिपूर्ति
एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के स्टूडेंट, जिनके पिता की आय दो लाख से कम है, उनको पढ़ाई की फीस शासन की ओर से कॉलेजों को दी जाती है। इसे शुल्क प्रतिपूर्ति कहते हैं। शासन स्टूडेंट के एकाउंट में फीस की निर्धारित रकम ट्रांसफर कर देता है। इस रकम को स्टूडेंट कॉलेज के खाते में जमा कर देते हैं। शासन के पास बजट की दिक्कत के कारण इस साल अब तक शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम स्टूडेंटों के खातों में नहीं आ सकी है।