पति मनोज की मौत से दुखी आराधना के आंसू पूछती उसकी बेटी।
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कानपुर साउथ। आराधना ने बताया कि करीब चार साल पहले पति मनोज के मुंह में छाले जैसे पड़े थे। शुरुआत में तो डॉक्टर अलसर बताकर इलाज करते रहे। आराम न मिलने पर जांच कराई गई तब पता चला कि उन्हें मुंह का कैंसर है। इसके बाद काकादेव स्थित एक निजी नर्सिंगहोम में इलाज शुरू हुआ। इलाज इतना महंगा था कि कन्नौज के सुरसी गांव की खेती, मकान और जेवर तक बेचने पड़े। साल भर पहले ऑपरेशन हुआ। उसके बाद से उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि चारपाई से उठ ही नहीं पाए। आराधना ने बताया कि इलाज में सब कुछ बिक गया लेकिन पति को नहीं बचाया जा सका। अब तो उनको पांच बेटियों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
रिश्तेदारों की मदद से भर रहा पेट
आराधना के मुताबिक ऑपरेशन के बाद से पति ने आटो चलाना बंद कर दिया था। जो कुछ पैसा था, सारा इलाज में खर्च हो गया था। घर में खाने का भी संकट हो गया। जेठ अनिल और ननद मिथिलेश, सुशीला, रेखा व शशि की मदद से बच्चों और उनका पेट भरता था।
फीस न जमा होने पर बच्चियों के काटे नाम
मनोज की चार बच्चियां घर के पास स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ती थीं। बड़ी बेटी मानसी ने बताया कि कई महीनों से फीस न जमा होने के कारण टीचर ताने देते थे। आखिर में करीब सात महीने पहले चारों का नाम स्कूल से काट दिया गया।
पुलिस, प्रशासन और समाजसेवी आगे आए
बर्रा विश्वबैंक निवासी समाजसेवी संदीप ठाकुर ने पांचों बेटियों की मदद के लिए 11000 रुपये की आर्थिक मदद की और आगे भी मदद का भरोसा जताया। पार्षद पुत्र अर्पित यादव ने भी परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिया और शवों के अंतिम संस्कार में मदद की। इसके बाद एसीएम प्रथम योगेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे और परिवार को राशन दिया। इसके अलावा प्रशासन से 30000 और मुख्यमंत्री कोष से आर्थिक सहायता दिलाने की भी बात कही। सीओ गोविंदनगर ने रुपयों का एक पैकेट दिया और बर्रा एसओ ने पांच हजार की आर्थिक मदद दी। जरौली स्थित सरदार पटेल इंटर कॉलेज स्कूल ने चारों बच्चियों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात कही है। प्रबंधक अरुण कुमार पटेल और प्रशांत पटेल ने बताया कि इन्हें 12वीं तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।