कानपुर। हर क्षेत्र में क्रांति ला रहा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) अब किसानों की मदद के लिए तैयार है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के छत्रपति शाहू जी महाराज इनोवेशन फाउंडेशन और एग्रीटेक कंपनी एनकोष की ओर से तैयार एनकोष एआई एप किसानों को स्मार्ट बनाएगा। यह बोवाई से लेकर कटाई तक की पूरी जानकारी देगा। एप 12 भाषाओं में सहायता करेगा। बुधवार को विवि के सेंटर फॉर अकादमिक में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी और एनकोष के संस्थापक आशुतोष तिवारी ने एप लॉन्च किया।
संस्थापक आशुतोष तिवारी ने बताया कि 50 से अधिक कृषि सारथी केंद्रों और 162 एफपीओ नेटवर्क के माध्यम से इसे पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा। एप में 50 हजार से अधिक किसानों का डाटा मौजूद है, जो उत्तर प्रदेश के 34 जिलों के रहने वाले हैं। टाइप न कर पाने वाले किसान बोलकर भी इससे अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। एप की एक्यूरेसी 95 फीसदी से अधिक है। यह एप किसानों को फसल चयन, बीज बोवाई, उर्वरक एवं कीटनाशक की सही मात्रा, रोग एवं कीट पहचान, मौसमी रणनीति और कटाई योजना जैसी जानकारी देगा।
साथ ही मंडी भाव और बाजार अपडेट की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे किसान बेहतर मूल्य निर्धारण कर सकेंगे। इससे किसान फसल प्रबंधन, उर्वरक उपयोग, रोग नियंत्रण और बाजार रणनीति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। एप लाॅन्च के मौके पर रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा, सीएसजेएम इनोवेशन फाउंडेशन से मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिव्यांश शुक्ला, प्रोग्राम ऑपरेशन मैनेजर प्रभाकर सिंह, इनक्यूबेशन मैनेजर अनिल त्रिपाठी, इनोवेशन ऑफिसर शैलेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
12 भाषाओं में मिलेगी जानकारी
इस एप में किसान 12 भाषाओं में अपने सवाल पूछ सकेंगे। उसी भाषा में उनको जवाब मिलेगा। वर्तमान में हिंदी के अलावा अंग्रेजी, बांग्ला, मराठी, उर्दू, गुजराती, पंजाबी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम व उड़िया भाषा में एप काम कर रहा है।
जल्द ही फसल रोग की बताएगा पहचान
आशुतोष ने कहा कि कम डिजिटल साक्षरता वाले किसानों के लिए जल्द व्हाट्सएप इंटीग्रेशन, कैमरा आधारित फसल रोग पहचान, मिट्टी जांच इंटीग्रेशन और विशेषज्ञ एग्रोनॉमिस्ट परामर्श जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। एआई आधारित सटीक सलाह से खेती की लागत में 20–30 फीसदी तक कमी और उत्पादन में 15 से 25 फीसदी तक वृद्धि संभव है।