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- सीवियर एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (सैम) बच्चों को चिह्नित करने के लिए यह उपकरण कारगर सिद्ध होगा
- डिवाइस त्वचा के संपर्क में आते ही कुपोषण की ओर से जानकारी देगा
संवाद न्यूज एजेंसी
सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉक्टरों की टीम ने गंभीर कुपोषण वाले बच्चों का पता लगाने के लिए उपकरण का निर्माण किया है। केंद्र सरकार की ओर से इस उपकरण के लिए पेटेंट भी प्रदान किया गया है। दो-तीन वर्षों से डॉक्टरों की टीम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में काम कर रही थी।
बाल रोग विभाग के डॉ. गणेश कुमार वर्मा, फॉर्मोकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो .डॉ. अर्पित वर्मा व मेडिकल ऑफिसर स्वल्पा वर्मा के नेतृत्व में इस डिवाइस को डिजाइन किया गया है। इस तकनीक से सैम बच्चों को चिह्नित कर उनके बेहतर कुपोषण प्रबंधन में यह उपकरण बहुत ही कारगर सिद्ध होगा।
डॉक्टरों ने बताया कि कुपोषण की गंभीर चिकित्सीय अवस्था (सीवियर एक्यूट मैलन्यूट्रीशन) बच्चों में बाल्यावस्था की बीमारियां एवं उनसे होने वाली मृत्यु का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इसीलिए इस डिवाइस की ओर से गंभीर तीव्र कुपोषण की स्थिति का पता लगने पर बच्चे को संतुलित आहार व उचित चिकित्सीय प्रबंधन प्रदान किया जा सके।
डॉक्टरों ने बताया कि डिवाइस में त्वचा संपर्क विश्लेषण के लिए एक गैर-इनवेसिव सेंसर मॉड्यूल, जैव रासायनिक मूल्यांकन के लिए एक न्यूनतम, दर्द रहित निष्कर्षण तंत्र और तत्काल परिणाम दृश्य के लिए एक स्पष्ट, पठनीय डिस्प्ले शामिल है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने डॉक्टर्स की टीम को मिली सफलता के लिए बधाई दी। उनके प्रयासों की सराहना की व प्रतिकुलपति प्रो.डॉ. रमाकांत, संकायाध्यक्ष प्रो. डाॅ. आदेश, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. एसपी सिंह बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश ने भी पूरी टीम को बधाई दी।