कानपुर। आपको याद है ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कैसे रूस के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन देश के हर नापाक इरादे को हवा में ही खत्म कर दिया था। अब उससे भी बेहतर स्वदेशी थ्री लेयर एयर डिफेंस सिस्टम कुशा खतरे को 400 किलोमीटर दूर से ही पहचान कर हवा में नष्ट कर देगा।
यह स्वदेशी सिस्टम 2028 तक देश के पास होगा। यह जानकारी बुधवार को सीएसजेएमयू के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने आए डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने कही। उन्होंने कहा कि स्वदेशी सिस्टम की सर्वाधिक रेंज 400 किलोमीटर, मीडियम 100 किलोमीटर और शॉर्ट रेंज 20 किमी है।
कार्यक्रम से पूर्व बातचीत में डॉ. कामत ने कहा कि स्वदेशी हथियारों में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। 2028 तक देश का डिफेंस सेक्टर स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल, लेजर हथियार, कुशा जैसी अत्याधुनिक डिफेंस तकनीक से लैस होगा। हाइपरसोनिक मिसाइल आवाज की गति से भी पांच गुना तेज चलती हैं।
इसके अलावा डायरेक्ट एनर्जी वेपंस जैसे लेजर हथियार पर भी काम चल रहा है। वर्तमान में दो केवी और पांच केवी के लेजर हथियार हैं। इसी साल 30 केवी का लेजर हथियार भी बनकर तैयार हो जाएगा। 2028 तक 100 केवी लेजर हथियार भारत के पास होगा। अभी तक यह अमेरिका के पास है।
वर्तमान में डीआरडीओ आने वाली पीढ़ी के हथियार और डिफेंस से जुड़ी तकनीक विकसित कर रहा है। 2028 के बाद से भारत की आत्मनिर्भरता कम होगी। डॉ. कामत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने भारत की ताकत को माना। कई चुनौतियां भी थीं जिस पर काम किया जा रहा है।
भारत के डी-4 (ड्रोन, डिटेक्ट, डिटर एंड डिस्ट्रॉय) सिस्टम, ब्रह्मोस जैसी हथियारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वर्तमान भारत दुनिया में अमेरिका, चीन, रूस के बाद डिफेंस के क्षेत्र में चौथी बड़ी ताकत है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता ने दुनिया को हमारी ताकत का अंदाजा कराया।
स्थापित की गईं पांच लैब
डिफेंस में अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करने के लिए पांच लैब स्थापित की गई हैं। बंगलूरू में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में, चेन्नई में कॉग्निटिव टेक्नोलॉजी में, कोलकाता में एसिमेट्रिक टेक्नोलॉजी में, मुंबई में क्वांटम टेक्नोलॉजी में और हैदराबाद में स्मार्ट मटेरियल्स में अनुसंधान चल रहा है। एआई बेस्ड साइबर सिक्योरिटी हथियार तैयार किए जा रहे हैं।