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शहर में स्वाइन फ्लू का पहला मरीज मिला

Fri, 08 Jan 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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शहर में स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। गुरुवार को साकेत नगर की पूजा दीक्षित (32) को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में भर्ती कराया गया।
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आईडीएच में भर्ती करानेे के लिए परिजनों को भटकना पड़ा। भर्ती करने के चार घंटे बाद वेंटीलेटर चलाया जा सका। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भी दिक्कत हुई। बता दें कि पिछले साल स्वाइन फ्लू से शहर में दस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

पूजा दीक्षित को 26 दिसंबर की रात अचानक उल्टी के साथ बुखार शुरू हो गया था। घर वालों ने आस-पास के डॉक्टरों से इलाज कराया लेकिन फायदा नहीं हुआ। तीन दिसंबर को हालत बिगड़ने पर परिजन पूजा को लेकर मधुराज नर्सिंग होम पहुंचे। मधुराज में डॉ. अनूप अवस्थी ने
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स्वाइन फ्लू की आशंका में गले की लार लेकर प्राइवेट पैथॉलाजी में जांच कराई तो स्वाइन फ्लू (एच1एन1) की पुष्टि हो गई। इसके बाद मधुराज अस्पताल ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। आईडीएच में पूजा को मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की नोडल अधिकारी डॉ. रिचा गिरी की यूनिट में रखा गया है।

सीएमओ डॉ. रामायण प्रसाद यादव ने बताया कि डिप्टी सीएमओ डॉ. अरविंद यादव के नेतृत्व में एक टीम आईडीएच भेजी गई थी। वहां व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जा रही हैं। महिला और घर के पांच सदस्यों को स्वाइन फ्लू से बचाव के कैप्सूल टेमीफ्लू की पांच दिन की डोज दे दी गई है। महिला की हालत स्थिर है। शुक्रवार को लार का सैंपल जांच के लिए  लखनऊ भेजा जाएगा। 

ये तो मार ही डालेंगे मरीजों को
कानपुर। डेंगू से हार मानने के बाद शहर का स्वास्थ्य महकमा स्वाइन फ्लू के आगे भी लाचार है। पिछले साल शहर में यह बीमारी फैलने और 10 लोगों की मौत होने के बावजूद इस साल के लिए प्रबंध नहीं किए गए।

गुरुवार को स्वाइन फ्लू से पीड़ित महिला जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) पहुंची तो महकमे की पोल खुल गई। आईडीएच में डॉक्टर नहीं थे तो महिला को हैलट इमरजेंसी भेज दिया गया।

हैलट इमरजेंसी से महिला को एक घंटे बाद वापस आईडीएच भेज दिया गया तो स्वाइन फ्लू वार्ड में महिला को भर्ती करने पर विचार-विमर्श शुरू हुआ। करीब एक घंटे तक महिला प्राइवेट अस्पताल की एंबुलेंस में ही बैठी रही। किसी तरह उसे वार्ड में भर्ती किया गया तो ऑक्सीजन सिलेंडर की समस्या खड़ी हो गई।

ऑक्सीजन सिलेंडर लगा तो पता चला कि एक घंटे का ही स्टॉक है। फिर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का इंतजार होने लगा। जूनियर डॉक्टरों के आने के चार घंटे बाद वेंटीलेटर शुरू किया जा सका।

बता दें कि पिछले साल स्वाइन फ्लू से शहर में पहली मौत जूही लाल कॉलोनी की ढाई साल की आप्ती की हुई थी। इसके बाद भारी संख्या में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए थे।

रात में पहुंचे प्रिंसिपल
आईडीएच में भर्ती महिला के इलाज की जानकारी लेने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार देर रात आईडीएच पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों, स्टाफ नर्स को स्वाइन फ्लू से बचाव के भी निर्देश दिए।

दवाओं, मास्क आदि की जानकारी ली। प्रिंसिपल ने बताया कि चेस्ट अस्पताल और मेडिसिन विभाग के जूनियर डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई है।

मास्क नहीं, रूमाल बांधा
आईडीएच में अचानक स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीज के आने से हड़कंप मच गया। महिला को वार्ड में प्राइवेट अस्पताल के ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ शिफ्ट किया गया था। बेड पर महिला को अस्पताल का सिलेंडर लगाने के लिए आईडीएच कर्मचारी को भेजा गया लेकिन उसे मास्क नहीं दिए गए। बचाव के लिए कर्मचारी ने मुंह पर रूमाल बांधा और सिलेंडर बदला।
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