कानपुर। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिठूर से 411.77 करोड़ रुपये की 48 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी करेंगे। यह परियोजनाएं बिठूर और बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र की हैं। रविवार को जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर सहित अन्य अधिकारी दिनभर तैयारियों में व्यस्त रहे।
मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सुबह 11 बजे बिठूर स्टेडियम पहुचेंगे। यहां पुरोहित कालीचरण दीक्षित और लवकुश आश्रम स्थित गुरुकुल में पढ़ने वाले सात बटुक मुख्यमंत्री का स्वागत करेंगे। यहां से वह सड़क मार्ग से होते हुए वाल्मीकि आश्रम जाएंगे। यहां पुजारी दुर्गा प्रसाद के साथ पूजा अर्चना करने के बाद रामायण पाठ में भाग लेंगे। वनदेवी मंदिर में पूजा अर्चना कर वाल्मीकि परिसर का भ्रमण करेंगे। इसके बाद वह सूबेदारनगर स्थित बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा के घर जाकर उनकी मां डॉ. निर्मल सिंह को श्रद्धांजलि देंगे। वहां से नानाराव पेशवा पार्क पहुंचकर जनसभा को संबोधित करेंगे।
सीएम के आगमन के मद्देजनर सफाई कर्मी दिनभर क्षेत्र को चमकाते रहे। वाल्मीकि आश्रम की तरफ जाने वाली करीब 100 मीटर सड़क बनवाई गई। वाल्मीकि आश्रम परिसर में रंग रोगन कराया गया और इसे रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया। नाना राव पेशवा स्मारक पार्क में काशी मुक्ति मंच के पास वॉटरप्रूफ पंडाल किया गया है। पीडब्ल्यूडी ने सिंहपुर और मंधना तक पैचवर्क कराया। हेलीपैड और जनसभा स्थल तैयार किया गया।
अपर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा के नेतृत्व में पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बिठूर स्थित नानाराव पार्क की तैयारियों को परखा। पुलिसकर्मियों को मुस्तैदी से ड्यूटी करने को कहा।
होर्डिंग से पट गया बिठूर कस्बा
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले रविवार को बिठूर कस्बा स्वागत होर्डिंग से पट गया। मंधना से बिठूर और कल्याणपुर से बिठूर जाने वाली सड़क किनारे जगह जगह राजनीतिक लोगों ने अपनी होर्डिंग लगवाई हैं।
महर्षि वाल्मीकि में हुई थी महाकाव्य रामायण की रचना
महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित करने और उनसे जुड़े पौराणिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। मान्यता है कि इसी आश्रम में महाकाव्य रामायण की रचना हुई और माता सीता को आश्रय मिला था। यहीं भगवान श्रीराम के पुत्रों लव-कुश का जन्म हुआ। पर्यटन विभाग का महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के कायाकल्प और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाने पर जोर है।