समझौता कराया था, पैसे देने को भरी थी हामी
डीसीपी पूर्वी के मुताबिक आरोपी से जब पूछताछ की गई तब पता चला कि पिछले साल अक्तूबर को जब पुलिस के पास मामला पहुंचा था तो इसमें दोनों पक्षों को बुलाया गया था। तत्कालीन चकेरी इंस्पेक्टर मधुर मिश्रा की मौजूदगी में दोनों पक्षों में समझौता हुआ था। तब बिल्डर शैलेंद्र ने पैसे वापस करने के लिए हामी भरी थी लेकिन वह बाद में मुकर गया था। विवाद लगातार गहराता गया।
एक मकसद होकर ठेकेदार की हत्या की
राजेंद्र के बेटे अरविंद की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया है, जिसमें शैलेंद्र श्रीवास्तव, उसके मुंशी राघवेंद्र तिवारी व अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया गया। उन पर एक मकसद (धारा 34) से साजिश रचकर(120बी) हत्या(302) करने की धारा लगाई गई है। डीसीपी ने बताया कि दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
पुलिस भी जिम्मेदार, जांच में किया खेल
परिजनों ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं। वारदात के पीछे पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। राजेंद्र के परिचित नरेश घई ने बताया कि एक सप्ताह पहले राजेंद्र ने पैसों के लेनदेन के विवाद के संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। पुलिस ने इस बारे में उनसे संपर्क भी किया था लेकिन बगैर जांच किए उसमें रिपोर्ट लगा कागजों में समस्या का निस्तारण कर दिया था। चकेरी थानेदार सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गए हैं। जांच में पता चलेगा कि आखिर पुलिस ऐसा खेल क्यों किया।
बारिश से धुले साक्ष्य
वारदात के कुछ देर बाद जमकर बारिश हुई, जहां घटना हुई वहां पर मौजूद पूरे साक्ष्य पानी से धुल गए। फोरेंसिक टीम भी मौके पर नहीं पहुंची। ज्वलनशील पदार्थ किसमें रखा गया था। वह भी बरामद नहीं हुआ है। वारदात से संबंधित कई सवाल अभी अनसुलझे हैं। जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे। उधर परिजनों ने आरोपियों को फांसी देने की मांग की है।