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कन्नौज हादसा: जिस बस में जिंदा जल गए थे 20 लोग उसके मालिक को पहले ही मिल चुका था गिरफ्तारी स्टे

Sat, 15 Feb 2020 10:56 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
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कन्नौज बस हादसा - फोटो : self
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कन्नौज स्लीपर बस कांड के बाद विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए शासन व प्रशासन पर आरोपियों को बचाने के आरोप सही साबित होते दिखाई दे रहे हैं। हादसे के चंद दिनों बाद ही बस मालिक को गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता और एक माह का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ मुख्य आरोपी ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक के गिरेबां तक नहीं पहुंच सके और इसका फायदा उसने न्यायालय से स्टे लेकर उठाया।
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10 जनवरी को घिलोई गांव के सामने हुए बस कांड के बाद से ही हर ओर प्रशासन ने ढुलमुल रवैया अपनाया। प्रशासन की लेट लतीफी का ही नतीजा है कि हादसे का शिकार हुए लोगों की संख्या अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रशासन की लापरवाही की यह तो मात्र बानगी है। एआरटीओ कार्यालय से स्लीपर बसों की फाइलें तक गायब हो गई, जिनका अभी तक पुलिस अता पता नहीं लगा सकी है।

 
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कन्नौज में जिस बस में हादसा हुआ उसके मालिक मालकिन बिमल एवं प्रीति चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला
हादसे के समय बस को कौन चला रहा था, इस विषय पर पुलिस की जांच अभी तक जहां की तहां रुकी हुई है। पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहे इस बस हादसे में पुलिस की एकमात्र सकारात्मक कार्रवाई बुकिंग एजेंटों की गिरफ्तारी रही। जिसे पुलिस ने समय रहते अंजाम दिया और चार बुकिंग एजेंटों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

हालांकि इन सभी बुकिंग एजेंटों को भी कुछ दिनों बाद ही न्यायालय से जमानत मिल गई। पुलिस इस हादसे के जिम्मेदार ट्रैवल्स एजेंसी मालिक विमल चतुर्वेदी की गिरफ्तारी को लेकर शुरू से ही कन्नी काटती रही। आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बाद भी पुलिस विमल चतुर्वेदी को सलाखों के पीछे नहीं ला सकी और उसने हादसे के एक माह बाद हाई कोर्ट न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे प्राप्त कर लिया। इससे पहले हादसे के पांच दिन बाद ही बस मालिक प्रीती चतुर्वेदी चतुर्वेदी ने भी गिरफ्तारी पर न्यायालय से स्टे लिया था।
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