कन्नौज स्लीपर बस कांड के बाद विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए शासन व प्रशासन पर आरोपियों को बचाने के आरोप सही साबित होते दिखाई दे रहे हैं। हादसे के चंद दिनों बाद ही बस मालिक को गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता और एक माह का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ मुख्य आरोपी ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक के गिरेबां तक नहीं पहुंच सके और इसका फायदा उसने न्यायालय से स्टे लेकर उठाया।
10 जनवरी को घिलोई गांव के सामने हुए बस कांड के बाद से ही हर ओर प्रशासन ने ढुलमुल रवैया अपनाया। प्रशासन की लेट लतीफी का ही नतीजा है कि हादसे का शिकार हुए लोगों की संख्या अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रशासन की लापरवाही की यह तो मात्र बानगी है। एआरटीओ कार्यालय से स्लीपर बसों की फाइलें तक गायब हो गई, जिनका अभी तक पुलिस अता पता नहीं लगा सकी है।