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गलत वेतन से यूनिवर्सिटी को करोड़ों का ‘चूना’

Thu, 02 Apr 2015 02:29 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रिसर्च एसोसिएट (आरए) से असिस्टेंट प्रोफेसर बनने वालोें को गलत वेतनमान दिया जा रहा है। इसका खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की आपत्ति और विधानसभा की लेखा परीक्षा प्रतिवेदन समिति की प्रारंभिक जांच - पड़ताल से हुआ है।
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पता चला है कि गलत वेतनमान से सालाना पांच-छह करोड़ रुपये का घाटा उठाया जा रहा है। इस पर  विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने कड़ी नाराजगी जताई है।

साथ ही अर्थ नियंत्रक को सस्पेंड कराने की हिदायत दी।  चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, एचबीटीआई और जिला विद्यालय निरीक्षक से संबद्ध 24 इंटर कॉलेजों पर खर्च धनराशि पर कैग ने आपत्ति की है। 2008-09 और 2009-10 के इन मामलों की सुनवाई बुधवार को लेखा परीक्षा प्रतिवेदन समिति ने सर्किट हाउस में की।

समिति के सभापति एवं विधायक अजय कपूर और सदस्यों के सामने कृषि विश्वविद्यालय का मामला रखा गया। कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह ने कहा कि रिसर्च एसोसिएट से असिस्टेंट प्रोफेसर बनने वालों के वेतन पर आपत्ति है। इसका निस्तारण लेखा परीक्षा प्रतिवेदन समिति कर सकती है।
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इस वजह से कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन को सालाना पांच-छह करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने कहा कि पैसे का गलत भुगतान आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए और कार्रवाई करके गलत भुगतान रोका जाए। यह मसला बेहद गंभीर है।

अब तक अर्थ नियंत्रक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह हैरान करने वाली बात है। अब पूरा मामला बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बीओएम) में ले जाकर फैसला लिया जाए। लेखा परीक्षा प्रतिवेदन समिति के सख्त रुख से कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन सहमा है।

अब रिसर्च एसोसिएट से असिस्टेंट प्रोफेसर बने शिक्षकों के वेतनमान या फिर एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) में कटौती संभव है। इस दौरान समिति के सदस्य एवं विधायक इरफान सोलंकी, बाला प्रसाद अवस्थी और सियाराम सागर मौजूद रहे।
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