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लिफाफा खुलेगा, पदनाम मिलेगा

Thu, 02 Apr 2015 02:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैश) के तहत प्रमोशन का इंटरव्यू देने वाले चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। डबल बेंच ने इंटरव्यू का लिफाफा खोलने और शिक्षकों को प्रोफेसर का पदनाम देने का आदेश पारित कर दिया है।
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10 पेज का यह आदेश हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। इससे शिक्षक उत्साहित हैं। जल्द ही बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बीओएम) की मीटिंग के बाद प्रमोशन और पदनाम का लिफाफा खोल दिया जाएगा। हालांकि सीधी भर्ती वालों को हाईकोर्ट से राहत नहीं दी गई है।

इसकी जांच-पड़ताल राज्यपाल राम नाईक की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी कर रही है। कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षकों को सीधी भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया एक साथ शुरू की गई। एक ही एक्सपर्ट पैनल से इंटरव्यू कराए गए, फिर लिफाफा खोलने के लिए बीओएम की मीटिंग बुलाई गई।
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धांधली के आरोप लगे तो राज्यपाल राम नाईक ने बीओएम की मीटिंग स्थगित करके लिफाफा खोलने पर रोक लगा दी। इस कारण प्रमोशन प्रक्रिया फंस गई। इसको लेकर ही डॉ. महक सिंह और डॉ. सीपी सचान ने हाईकोर्ट में याचिका (1868/2015,1895/2015) दाखिल की। शिक्षकों ने दलील दी कि प्रोफेसर का वेतनमान लंबे समय से मिल रहा है। अब इंटरव्यू हुआ तो पदनाम देने की प्रक्रिया रोक दी गई है।

इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस वीके शुक्ला और जस्टिस रंजना पांड्या ने की और फैसला सुनाते हुए प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया को आधार बनाकर प्रमोशन प्रक्रिया रोकना ठीक नहीं है। प्रमोशन के बाद जिसे आपत्ति हो, वह राज्यपाल के यहां रिप्रजेंटेशन दे सकता है।

सीधी भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि इसकी जांच राज्यपाल हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की कमेटी से करा रहे हैं। रिपोर्ट आने का इंतजार किया जाना चाहिए। वहीं हाईकोर्ट के आदेश से उत्साहित शिक्षकों का कहना है कि जल्द ही कुलपति से बीओएम की मीटिंग करने और लिफाफा खोलकर रिजल्ट जारी करने की मांग की जाएगी।
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