कानपुर। जन्माष्टमी को लेकर घरों और मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजार लड्डू गोपाल के कपड़े, झूले, पलंग और खिलौनों से नजर आ रहे हैं। शहर में एक कला प्रेमी ऐसे हैं, जिनके हाथों का जादू भक्ति, आस्था और परंपरा की मिसाल पेश कर रहा है। उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि खिलौनों की पूरी दुनिया बसा रखी है। सबसे खास कान्हा की विभिन्न लीलाओं पर बनाए गए खिलौने हैं।
हम बात कर रहे हैं बैंक ऑफ बड़ौदा से रिटायर्ड नवाबगंज निवासी गोपाल खन्ना की, जो कि 78 वर्ष की उम्र में भी अपने हुनर को रफ्तार दिए हुए हैं। वह हर वर्ष जन्माष्टमी पर नवाबगंज के डिप्टी श्याम लाल मंदिर में झांकी सजाते हैं। सारी मूर्ति, खिलौने और झांकी उनकी बनाई हुई है। पहले हटिया में अपनी झांकी सजाते थे।
18 सौ साल पुराने खिलौने हैं उनके पास
गोपाल खन्ना के पास गुप्तकाल के खिलौने भी हैं। यह करीब 18 सौ साल पुराने हैं। इनमें पहिये, मूर्तियां आदि शामिल हैं। खिलौनों को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डिप्टी डायरेक्टर एलएम बहल ने 2010 में प्रमाणित कर चुकी है। अब गोपाल नए डिजाइन के खिलौने तैयार कर रहे हैं।
17 सौ खिलौने का है कलेक्शन
गोपाल खन्ना के मुताबिक वह महज चार या पांच साल के होंगे तब से उन्हें खिलौने बनाने का शौक था। पिता रिजर्व बैंक में अधिकारी थे। वह भी लकड़ी के कार्य में हुनरमंद थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर खिलौने बनाने शुरू किए। अब तक उन्होंने तीन सौ खिलौने और कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी झांकियां सागौन की लकड़ी से तैयार की हैं। घर पर एक खूबसूरत रेलवे स्टेशन और ट्रेन बनाई है। उनके पास सौ साल पुराने जापान, फ्रांस, इटली और इंग्लैंड के खिलौने हैं। यह आजादी से पहले भारत में आते थे। ये चीनी मिट्टी, मिट्टी, तांबा, पीतल, कांसा, लेड से बने हुए हैं। गोपाल खन्ना देशभर में खिलौनों की प्रदर्शनी लगा चुके हैं। उन्हें गोवा में गवर्नर ने पुरस्कृत किया था। इनमें भगवान की मूर्ति, केदारनाथ, बद्रीनाथ का स्वरूप के अलावा महल, घर, मंदिर, ट्रॉफी, तोते, हाथी, झूले, बांसुरी, गदा आदि भी हैं।