अफसरों को शक है कि यह परिवार धार्मिक संस्था के अनुयायियों के जरिए टेरर फंडिंग (आतंकियों को धन मुहैया) करवाता है। अफसरों ने इस परिवार के लोगों के बैंक खातों के नंबर और आधार कार्ड की कॉपी लेकर छानबीन तेज कर दी है। मकनपुर, बिल्हौर में स्थित एक धार्मिक स्थल की देखरेख एक परिवार करता है। यह परिवार एक धार्मिक संस्था से भी ताल्लुक रखता है। इस संस्था के देश-विदेश में भारी संख्या में अनुयायी हैं। परिवार के लोग अक्सर विदेश आते-जाते रहते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली में टेरर फंडिंग से जुड़े दो लोगों को पकड़ा था। उनसे पूछताछ में बरेली के फतेहगंज निवासी राशिद पुत्र इजराइल के बारे में जानकारी मिली थी। राशिद दिल्ली की एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। सुरक्षा एजेंसी ने बरेली में छापा मारा, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। राशिद के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर गुरुवार को सुरक्षा एजेंसी की टीम ने मकनपुर में दबिश दी, लेकिन राशिद पकड़ में नहीं आया।
इस परिवार के मकान और धार्मिक स्थल पर दबिश देने वाली टीम में दिल्ली और कोलकाता के दो-दो अफसर भी मौजूद थे। टीम जैसे ही गेट खोलकर भीतर पहुंची, तो परिवार के लोगों ने रोक लिया। हंगामा करने पर गांव के भी कई लोग पहुंच गए। जब गांव वालों को पता चला कि मामला टेरर फंडिंग से जुड़ा है, तो वे शांत हो गए। परिवार के लोगों के टीम का रास्ता रोकने और बहस करने का फायदा उठाकर राशिद मकान के पीछे के गेट से निकल गया। हालांकि इस बारे में किसी भी अफसर ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
वहीं बिल्हौर थानाप्रभारी का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले में आरोपी राशिद की तलाश में दिल्ली से एक टीम यहां आई थी। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस टीम ने राशिद के मोबाइल के लोकेशन के आधार मकनपुर क्षेत्र में गेस्ट हाउस, शीबू, अब्दुल वकार समेत कई लोगों के घरों में छानबीन की, लेकिन राशिद हाथ नहीं लगा। राशिद का मोबाइल स्विच ऑफ होने से टीम को उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई। इस पर शुक्रवार को टीम दिल्ली वापस चली गई।
सूत्रों के मुताबिक इस परिवार से जुड़े एक शख्स की अफसरों और बड़े नेताओं तक पहुंच है। परिवार के एक व्यक्ति ने उसी का नाम लेकर सुरक्षा एजेंसी के एक अफसर को फोन मिलाया। अफसर के अपना परिचय देने के बाद फोन करने वाले ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। सर्विलांस की मदद से टीम फोन करने वाले शख्स तक पहुंची तो वह अफसरों के सामने रोने लगा।
अफसरों ने उसे हिदायत देकर छोड़ दिया। अफसरों को जानकारी हुई है कि टेरर फंडिंग के लिए विदेश से गुजरात रकम आती है। गुजरात से हवाला के जरिए इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाता है।
इसका मैनेजमेंट राशिद और उसके साथी इस परिवार के जुड़े अनुयायियों के माध्यम से करते हैं। जिस धार्मिक संस्था से यह परिवार जुड़ा है, उसके देश और विदेश में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। इन्ही अनुयायियों के जरिए टेरर फंडिंग कराई जाती है। प्रारंभिक जांच में बांग्लादेश, दुबई, सीरिया और यूनाइटेड स्टेट से फंडिंग कराए जाने का पता चला है।