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Kanpur: सात साल पहले पुलवामा हमले के शहीदों की पत्नियों को मिली जमीन तो छलक पड़े आंसू

Tue, 10 Feb 2026 11:21 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

रियल इस्टेट कंपनी के निदेशक सात साल पहले किए वादे को पूरा करने कचहरी पहुंचे। पुलवामा हमले में शहीद प्रदीप सिंह व श्याम बाबू की पत्नियों के नाम जमीन दान की। 
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शहीदों की पत्नियों को मिली जमीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुलवामा में सात साल पहले हुए आतंकी हमले में कानपुर के दो शहीद परिवारों से किया गया वादा मंगलवार को रियल इस्टेट कंपनी के निदेशकों ने पूरा कर दिया। शहीदों की पत्नियों के नाम सौ-सौ वर्गगज के प्लाट की रजिस्ट्री कराई तो पत्नियों की आंखों में जहां जमीन पाने की खुशी दिखी और पति की शहादत को याद कर आंसू भी छलक पड़े।
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले में कई जवान शहीद हुए थे। इसमें कानपुर से कल्याणपुर के रहने वाले प्रदीप सिंह यादव और कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के रयगवां के रहने वाले श्याम बाबू के अलावा उन्नाव के पुरवा निवासी अजीत कुमार गौतम उर्फ आजाद भी शामिल थे। घटना के बाद कल्याणपुर के इंदिरानगर दयानंद विहार स्थित त्रियम रियलटेक के अधिकारियों ने तीनों शहीदों के घर पहुंचकर परिवारवालों को सौ-सौ वर्गगज जमीन सहानुभूतिवश देने का वादा किया था।
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सात साल बाद आखिर वादा पूरा करने की घड़ी आई। कंपनी के निदेशक पंकज शुक्ला और शरद रंजन मंगलवार को कचहरी पहुंचे। शहीद प्रदीप की पत्नी नीरज यादव और शहीद श्याम बाबू की पत्नी रूबी देवी के नाम पर गंगाकुंज स्थित कटरी ख्योरा की सौ-सौ वर्गगज जमीन के दानपत्र विलेख को पंजीकृत कराया। दोनों दानपत्र पंकज शुक्ला के भाई अधिवक्ता दिनेश शुक्ला ने पंजीकृत कराए। पंकज ने बताया कि उन्नाव के शहीद अजीत कुमार गौतम की पत्नी को उन्नाव में ही जमीन दी जाएगी। बुधवार को उन्नाव जाकर उनके दानपत्र को भी पंजीकृत करवा दिया जाएगा।

शहीद प्रदीप सिंह यादव की पत्नी नीरज यादव - फोटो : अमर उजाला
तीन बच्चों की परवरिश के लिए रखा दिल पर पत्थर
शहीद प्रदीप सिंह यादव की पत्नी नीरज यादव घटना को याद करके रो पड़ीं। रुंधे गले से बताया कि मेरे पति दस दिन की छुट्टी पर आए थे। घटना के दो दिन पहले ही कानपुर से जम्मू गए थे। 10 फरवरी को गए, 11 को जम्मू पहुंचे और 14 को यह घटना हो गई थी। बच्ची स्कूल गई थी मैं टीवी देख रही थी। तभी आतंकी हमले की खबर आई। मैं पति को फोन मिलाती रही लेकिन फोन नहीं उठा। नीरज ने बताया कि शहादत की खबर सुनकर बदहवास हो गई थी लेकिन तीन बच्चों 17 व आठ वर्षीय बेटी और छह वर्षीय बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी मुझ पर थी। खुद को संभाला और दिल पर पत्थर रखकर बच्चों के लिए जी रही हूं। तीनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

 
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शहीद श्याम बाबू की पत्नी रूबी देवी - फोटो : अमर उजाला
शहादत की बात सुनी तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा
शहीद श्याम बाबू की पत्नी रूबी देवी ने बताया कि पति 10 को कानपुर से वापस गए थे और 14 फरवरी को आतंकी हमले की सूचना मिली। हादसे वाले दिन तीन बजे तक उनकी पति से बात होती रही लेकिन थोड़ी देर बाद कॉल किया तो फोन नहीं उठा। सेना के अधिकारी घर पहुंचे थे और पिता जी को हादसे के बारे में बताया। मेरी गोद में पांच माह का बच्चा था इसलिए घरवालों ने उस समय मुझे कोई जानकारी नहीं दी। बाद में मुझे बताया गया तो लगा जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। अब 11 और सात वर्षीय दो बेटे हैं। उनकी अच्छी परवरिश ही मेरे जीवन का लक्ष्य रह गया है। जमीन देने का जो वादा किया गया था वह भी आज पूरा कर दिया गया।
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