केपीएम अस्पताल के वार्ड में बंद पड़ा पंखा व कूलर।
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कानपुर। अप्रैल की शुरुआत में ही पारा 40 पार कर चुका है। लू ने दस्तक दे दी है। ऐसे में सावधान रहें। भरी दोपहरी निकलने से पहले कुछ सावधानी बरतें। वर्ना लू अपना शिकार बना लेगी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में तापमान पिछले कई सालों से इतना अधिक नहीं रहा। अप्रैल 2012 के पहले हफ्ते में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। डॉ. दुबे ने बताया कि हालांकि अप्रैल के अंत तक पारा 42 डिग्री के आसपास रहता है। पर, अबकी शुरुआती तापमान सामान्य से 4.0 डिग्री सेल्सियस अधिक होकर 40 के पार होना चिंता का विषय है। इस बार महीने के अंत तक पारा 45 तक पहुंच सकता है। वहीं रात के तापमान में लंबा वैरिएशन होने से इस हफ्ते तापमान और बढ़ने की संभावना है। उधर, रात का तापमान 24.5 से गिर कर 22.8 डिग्री सेल्सियस हो गया। दोपहर की आर्द्रता 52 से 45 फीसदी रिकार्ड की गई।
प्रमुख सचिव पंखा भी न चलवा सके
कानपुर। प्रमुख सचिव के दौरे का क्या फायदा जो सरकारी अस्पतालों के पंखा भी नहीं चालू करा सके। एसी और कूलर में बैठने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को भीषण गर्मी में बेड पर पड़े मरीजों को देख तरस भी नहीं आ रहा है। तीमारदार घरों से पंखा लाकर मरीजों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। हैलट का हाल ही अजीब है। डंडे तो हैं पर उनमें पंखा नहीं। कूलर कबाड़ हो चुके हैं। जो सही हैं वह चलाए नहीं जाते। एक दिन पहले आए प्रमुख सचिव ने ऐसे हालात पर चिंता जता उन्हें ठीक कराने को कहा था। पर माननीय गए बात गई। अमर उजाला ने हैलट, उर्सला, केपीएम की पड़ताल की तो मरीजों का दर्द सामने आ गया।