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टीचिंग एजुकेशन में अब इंटीग्रेटेड कोर्स की पढ़ाई

Sat, 06 Aug 2016 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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कार्यशाला का दीप जलाकर उद्घाटन करते कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, साथ में डॉ. एसके द्विवेदी, डॉ. एनडी माथुर व प्रो. मृदुला भदौरिया - फोटो : amarujala
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टीचिंग एजुकेशन में सुधार के उद्देश्य से बीएड, बीटीसी और बीपीएड का पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स लांच किया जाएगा। इनमें इंटरमीडिएट के बाद एडमिशन लिया जा सकेगा। इंटीग्रेटेड कोर्स के तहत अंडर ग्रेजुएट (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) की पढ़ाई एक साथ कराई जाएगी। इससे शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
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अभी ग्रेजुएशन के बाद टीचिंग एजुकेशन शुरू होता है।  कानपुर यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय गेस्ट हाउस के सभागार में शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 पर चर्चा की गई। इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, लखनऊ यूनिवर्सिटी के डॉ. एसके द्विवेदी, डॉ. एनडी माथुर और डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की विभागाध्यक्ष प्रो. मृदुला भदौरिया ने किया, फिर टीचिंग एजुकेशन में सुधार की कवायद की गई। कहा गया कि अब टीचिंग स्किल बढ़ाने की जरूरत है।

इसके लिए रिसर्च मैथडलॉजी पर फोकस करना होगा। बीएड की कोआर्डिनेटर डॉ. रश्मि गोरे ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया आसान बनाना चाहिए। एएनडी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. नूतन वोहरा ने सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों के उत्पीड़न का मामला उठाया और कहा कि बेहद कम वेतन पर पठन-पाठन का काम कराया जा रहा है। इससे शैक्षिक गुणवत्ता मेें सुधार बाधित है। इस पर लगाम लगाना जरूरी है।
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उत्तर प्रदेश स्व वित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी और संयोजक डॉ. बृजेश भदौरिया ने शिक्षकों का संकट बताया। कहा कि अब नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नीट) की अनिवार्यता कर दी गई है। इस कारण क्वालीफाइड शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। इस बिंदु को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल करना जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुनेश कुमार ने किया। डॉ. अनुपमा यादव ने रजिस्ट्रेशन का काम संभाला।  

पीजी में सेल्फ फाइनेंस की पढ़ाई न हो
एमए, एमएससी और एमकॉम सहित पीजी के अन्य कोर्स की पढ़ाई सेल्फ फाइनेंस के तहत नहीं कराई जानी चाहिए। सरकारी कॉलेजों मेें पढ़ाई हो और सीटें प्रवेश परीक्षा से भरी जाएं। इससे शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता बरकरार रहेगी। 
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