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गुरु ने महकाई बच्चों के जीवन की बगिया

Sun, 04 Sep 2016 10:21 PM IST
दिलीप सिंह, कानपुर
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बच्चों को पर्यावरण की जानकारी देते शिक्षक मनीष तिवारी
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हरी घास पर बिखेर दी हैं ये किसने मोती की लड़ियां, कौन रात में गूंथ गया है ये उज्जवल हीरों की करियां, लुटा गया है कौन जौहरी, अपने घर का भरा खजाना, पत्तों पर फूलों पर पग-पग, बिखरे हुए रतन हैं नाना...महाकवि सोहन लाल द्विवेदी ने प्रकृति प्रेम में भावविभोर होकर ये कविता लिखी थी। इसे फिर गुनगुनाने का अवसर है। पेड़-पौधे और वन, इनसे ही है जीवन...किताबों में यह पढ़कर पर्यावरण के प्रति ज्यादा लगाव नहीं हो पाता तो एक शिक्षक ने स्कूल में ही वन तैयार कर दिया। हरियाली के साथ भारतीय संस्कृति और सभ्यता की लताएं भी लहराईं। बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ पेड़-पौधों के बीच बैठाकर उनकी जड़ों को पर्यावरण प्रेम से सींचा। नतीजा यह हुआ कि बच्चे जितनी चिंता अपनी कॉपी-किताबों की करते हैं उतनी ही अपने हरे-भरे उपवन की भी। पर्यावरण प्रेम का ऐसा अनूठा ज्ञान कम ही शिक्षक दे पाते हैं।
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कमला नगर स्थित सर पद्मपत सिंहानिया एजूकेशन सेंटर में वनस्पति विज्ञान और कीट विज्ञान के विभागाध्यक्ष मनीष तिवारी ने स्कूल में ही बॉटनिकल गार्डन विकसित कर दिया है। बच्चे यहां बैठकर न केवल किताबी ज्ञान लेते हैं बल्कि सामने मौजूद पेड़-पौधों, कीट-पतंगों के माध्यम से अपने व्यवहारिक ज्ञान की भी जड़ें भी मजबूत करते हैं। मनीष ने स्कूल की खाली जमीन को अपनी मेहनत के दम पर हरा-भरा कर दिया है। पर्यावरण के साथ भारतीय संस्कृति-सभ्यता को सींचने के लिए उन्होंने नवग्रह वाटिका, पंचवटी, बुद्ध वाटिका, पंचपल्लव विकसित किया है। यहां पेड़ों की कई दुर्लभ प्रजातियां भी हैं। मनीष ने बताया कि एनसीईआरटी की कक्षा एक से लेकर इंटर तक की साइंस की बुक में जिन वनस्पतियों का भी जिक्र है, वे सब यहां मौजूद हैं। मनीष यहां 25 वर्षों से पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1997 में मिसाइलमैन अब्दुल कलाम के एक बयान ‘भारत को वैज्ञानिक श्रेष्ठता के शिखर पर पहुंचना है तो भारतीय शास्त्रों और परंपराओं की पुर्नव्याख्या और सकारात्मक विवेचना करनी होगी..ने उनको प्रेरित किया। इस समय अकेले बॉटनिकल गार्डन में ही 1500 से अधिक पेड़ पौधे हैं। बुद्ध वाटिका तो अपने आप में दुर्लभ है, इसमें जिस पीपल के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, उस पीपल के पेड़ से विकसित किया गया पेड़ भी लगाया गया है।
बॉटनिकल गार्डन : इसमें उन सैकड़ों पेड़-पौधों की शृंखला है, जिसमें उनके वर्गीकरण के सिद्धांत और विकास प्रक्रिया को स्टूडेंटों को सजीव दिखाया जाता है। इसके अलावा स्कूल परिसर में रुद्राक्ष, सिंदूर का पेड़, इलायची, पाम, केवड़ा, आम्रपाली, बालम खीरा, कल्प वृक्ष, सीता अशोक, कृष्णम प्रजाति का बरगद, रबर, तेल, फल के पेड़ों की सैकड़ों प्रजातियां मौजूद हैं।
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बुद्ध वाटिका : पीपल, आंवला, जामुन, खिरनी, पाकड़, चीड़, नीम, शीशम, बरगद सहित अन्य पेड़-पौधे हैं।
पंचवटी : आंवला, पीपल, बरगद, अशोक, बेल।
पंच पल्लव : गूलर, बरगद, पीपल, पाकड़, आम।
नवग्रह वाटिका : गूलर (शुक्र), ढाक (चंद्रमा), लटजीरा (बुध), खैर (मंगल), पीपल (बृहस्पति), श्वेतार्क या आक (सूर्य), शमी (शनि), दूब (राहु), कुश (केतु)।
 
प्रोफाइल
नाम : मनीष तिवारी
शिक्षा : एमएससी (जूलोजी)
कीट विज्ञान में पुस्तक लेखन सहित आईएमए के लिए शैक्षिक योगदान।
वर्ल्ड एजूकेशन समिट 2013-14 के विजेता रहे।
2013 में पियर्सन अवॉर्ड, यह केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से दिया जाता है।
सीबीएसई के पूर्व डायरेक्टर एकेडमिक जी बाला सुब्रमण्यम ने सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया।
राष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
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