उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ का मंडलीय अधिवेशन अकबरपुर
महाविद्यालय में आयोजित किया गया। अधिवेश में संघ की मांगें रखी गई। मंडलीय
अधिवेशन को संबोधित करते हुए प्रदेश कोआर्डिनेटर गोमती प्रसाद शुक्ल ने
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के मांग पत्र को आए अतिथियों को
पढ़कर सुनाया।
उन्होंने कहा कि अर्ह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद
पर पदोन्नति 25 अगस्त 2004 को समाजवादी पार्टी सरकार के तत्कालीन राज्य
शिक्षा मंत्री की सहमति सुनिश्चित कराने, लिपिक संवर्ग में न्यूनतम ग्रेड
पे में राज्य कर्मचारियों से समानता करने आदि की मांगों को सम्मेलन आए
मुख्य अतिथियों के सामने रखा।
जिलाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि संघ
के कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की भांति उपार्जित अवकाश का नकदीकरण
कराने, न्यूनतम पेंशन, चिकित्सकीय प्रतिभूति सुविधा, चतुर्थ श्रेणी
कर्मचारियों को आउटसोर्स की व्यवस्था खत्म कर पूर्व की सुविधा बहाल करने
वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शिक्षणेत्तर संघ की सेवा नियमावली बनाने और
पहले की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों बीटीसी प्रशिक्षण में दस प्रतिशत कोटा
निर्धारित कराने आदि की मांगों कोे प्रदेश नेतृत्व के समाने रखा। उन्होंने
संगठन को मजबूत करने की बात भी कही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य
अतिथि केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा
कि शिक्षणेत्तर संघ मांगे पूरी तरह जायज हैं। सूबे में भाजपा की सरकार
आएगी तो उन्हें शत-प्रतिशत पूरा कराया जाएगा। कहा कि शिक्षणेत्तर संघ को
लोगों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि प्रदेश में शिक्षा
व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मांगों
को पूरा करना जरूरी है।
सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा कि
शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का उत्पीड़न करता है
तो उसकी शिकायत कर जिले से हटवाया जाएगा। शिक्षणेत्तर संघ शिक्षा व्यवस्था
को चलाने वाली रीढ़ है। उसका उत्पीड़न होने नहीं दिया जाएगा।
स्नातक
एमएलसी अरुण पाठक ने कहा कि हमने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की
लड़ाई लड़ी है। फिर चाहे वह शिक्षक हों या फिर शिक्षणेत्तर कर्मचारी हों।
उन्होंने कहा कि मैने मांग पत्र को पूरी तरह पढ़ा है। मुख्यमंत्री से इन
मांगों पर बात कर पूरी करवाने की कोशिश करूंगा। कार्यक्रम को जिला मंत्री
देवेंद्र कुमार मिश्र, मलखान सिंह आदि ने संबोधित किया। सम्मेलन में आए
अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।