कानपुर। टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। शहर में लगभग चार हजार शिक्षकों की नौकरी दांव पर लगी है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन और उग्र होगा।
शिक्षकों का कहना है कि भारी गैर शैक्षणिक कार्यभार, एसआईआर व जनगणना की ड्यूटी के कारण परीक्षा की तैयारी संभव नहीं है। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने बताया कि लगातार प्रदर्शन से कई शिक्षक रक्तचाप के मरीज हो गए हैं। उन्होंने 2027 के बाद टीईटी पास न करने पर सेवानिवृत्ति के फैसले को गलत बताया। हाल ही में तीन तारीख को प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड अभियान से संदेश भेजा गया। 13 को मशाल जुलूस भी निकाला गया। भीतरगांव विकासखंड के शिक्षक अभय मिश्रा ने कहा कि उनकी नौकरी के केवल पांच साल शेष हैं। उनकी नियुक्ति 2006 में हुई थी। सेवा शर्तें पूरी करने के बाद मिली नौकरी भी संकट में आ गई है।
जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष योगेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि जिन शिक्षकों ने अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी स्कूलों में दी, उन्हें अब टीईटी के आधार पर बाहर करना अनुचित है। उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव तिवारी के अनुसार यह निर्णय शिक्षकों के भविष्य के साथ अन्याय है।